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Pankh Diye Aakash Na Doge | Kanhaiyalal Sethia
Episode 1091
पंख दिए आकाश न दोगे | कन्हैयालाल सेठिया
पंख दिए, आकाश न दोगे?
तो जड़ता चेतनता क्या है?
फिर क्षमता-दर्बलता क्या है?
केवल खेल, अगर रचना को-
प्राण दिए, विश्व…
4 months, 1 week ago
Bas Ek Kaam Yehi Baar Baar Karta Tha | Madhav Kaushik
Episode 1090
बस एक काम यही बार बार करता था । माधव कौशिक
बस एक काम यही बार बार करता था
भँवर के बीच से दरिया को पार करता था
उसी की पीठ पर उभरे निशान ज़ख़्मों के
जो हर …
4 months, 1 week ago
Harmonium Ki Dukaan Se | Kumar Ambuj
Episode 1089
हारमोनियम की दुकान से । कुमार अम्बुज
उस पुरानी-सी दुकान पर ग्राहक कोई नहीं था
बस एक बूढ़ा आदमी चुपचाप झुका हुआ एक हारमोनियम पर
इतना तन्मय और बाकी चीज़ों…
4 months, 1 week ago
Saarangi | Krishna Mohan Jha
Episode 1088
सारंगी | कृष्णमोहन झा
उस आदमी ने किया होगा इसका आविष्कार
जो शायद जन्म से ही बधिर हो
और जो अपनी आवाज़ खोजने
बरसों जंगल-जंगल भटकता रहा हो
या उस आदमी ने
जिसने…
4 months, 1 week ago
Reedh | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 1087
रीढ़। विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
कौन-सा अंग है
आदमी के शरीर में सबसे कीमती
प्रेममार्गियों ने कहा दिल
ज्ञानमार्गियों ने कहा दिमाग
कर्ममार्गियों ने कहा हाथ
पर री…
4 months, 1 week ago
Bhasha | Vivek Nirala
Episode 1086
भाषा । विवेक निराला
मेरी पीठ पर टिकी
एक नन्ही-सी लड़की
मेरी गर्दन में
अपने हाथ डाले हुए
जितना सीख कर आती है
उतना मुझे सिखाती है
उतने में ही अपना
सब कुछ दे …
4 months, 1 week ago
Antariksh Ki Sair | Trilok Singh Thakurela
Episode 1085
अंतरिक्ष की सैर | त्रिलोक सिंह ठकुरेला
नभ के तारे कई देखकर
एक दिन बबलू बोला।
अंतरिक्ष की सैर करें माँ
ले आ उड़न खटोला॥
कितने प्यारे लगते हैं
ये आसमान के ता…
4 months, 2 weeks ago
Benaras | Kedarnath Singh
Episode 1084
बनारस | केदारनाथ सिंह
इस शहर मे वसंत
अचानक आता है
और जब आता है तो मैंने देखा है
लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ़ से
उठता है धूल का एक बवंडर
और इस महान पुराने शह…
4 months, 2 weeks ago
Nav Varsh | Harivansh Rai Bachchan
Episode 1083
नव वर्ष | हरिवंशराय बच्चन
वर्ष नव
हर्ष नव
जीवन उत्कर्ष नव।
नव उमंग,
नव तरंग,
जीवन का नव प्रसंग।
नवल चाह,
नवल राह,
जीवन का नव प्रवाह।
गीत नवल,
प्रीति नवल,
जीवन क…
4 months, 2 weeks ago
Akhbaar | Balswaroop Rahi
Episode 1082
अखबार | बालस्वरूप राही
जिस दिन होता है इतवार,
घर में आते ही अखबार,
ऐसी छीन-झपट मचती
हो जाते हैं हिस्से चार!
पापा को खबरों का चाव,
माँ पढ़ती दालों के भाव…
4 months, 2 weeks ago