Podcast Episodes
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Basant | Kedarnath Singh
Episode 1070
बसन्त | केदारनाथ सिंह
और बसन्त फिर आ रहा है
शाकुन्तल का एक पन्ना
मेरी अलमारी से निकलकर
हवा में फरफरा रहा है
फरफरा रहा है कि मैं उठूँ
और आस-पास फैली हुई चीज…
4 months, 4 weeks ago
Jab Jab Tum Chahoge Mujhse | Adiba Khanum
Episode 1069
जब जब तुम चाहोगे मुझसे । अदीबा ख़ानम
जब जब तुम चाहोगे मुझसे एक प्रेम पगी कविता
मेरी जान मैं तम्हें टूट कर प्रेम दूँगी
मेरे पसंदीदा मौसमों का आगाज़ हो तु…
4 months, 4 weeks ago
Mujhe Tum Mile | Phanishwar Nath Renu
Episode 1068
मुझे तुम मिले! | फणीश्वरनाथ रेणु
मुझे तुम मिले!
मृतक-प्राण में शक्ति-संचार कर;
निरंतर रहे पूज्य, चैतन्य भर!
पराधीनता-पाप-पंकिल धुले!
मुझे तुम मिले!
रहा सूर…
4 months, 4 weeks ago
Daudte Daudte Pyar | Nilesh Raghuvanshi
Episode 1067
दौड़ते-दौड़ते प्यार। नीलेश रघुवंशी
वह दौड़ रहा है
दिन ब दिन उसकी भागमभाग बढ़ती ही जा रही है
वह जितना दौड़ता जाता है सड़कें उतनी लंबी होती जाती हैं
दिन …
5 months ago
Rahe Na Koi Bhookha-Nanga | Koduram Dalit
Episode 1066
रहे न कोई भूखा–नंगा | कोदूराम दलित
पराधीन रहकर सरकस का शेर नित्य खाता है कोड़े,
पराधीन रहकर बेचारे बोझा ढोते हाथी-घोड़े ।
माता–पिता छुड़ा, पिंजरे में रख…
5 months ago
Hanso | Shraddha Upadhyay
Episode 1065
हँसो। श्रद्धा उपाध्याय
कोई गिरे तो तुम उसे उठाते हुए गिरो फिर हँसो
तुम्हारी खिलखिलाहट से किसी खंडहर में उड़ जाएंगे चमगादड़
इतिहास में कई अवकाश हैं …
5 months ago
Mil Hi Jayega Kabhi | Ahmed Mushtaq
Episode 1064
मिल ही जाएगा कभी | अहमद मुश्ताक़
मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है
वो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता है
जिस की साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे …
5 months ago
Awara Din | Poornima Varman
Episode 1063
आवारा दिन। पूर्णिमा वर्मन
दिन कितने आवारा थे
गली गली और
बस्ती बस्ती
अपने मन
इकतारा थे
माटी की
खुशबू में पलते
एक खुशी से
हर दुख छलते
बाड़ी, चौक, गली अमराई
हर पत्…
5 months, 1 week ago
Ek Khwaish | Sewak Nayyar
Episode 1062
एक ख़्वाहिश । सेवक नैयर
और मैं सोचता हूँ
यूँही
उम्र भर
एक कमरे में
शतरंज की मेज़ पर
तुम मुसलसल मुझे
मात देती रहो
मैं मुसलसल यूँही
मात खाता रहूँ
अपनी
तक़दीर पर
मु…
5 months, 1 week ago
Iska Kya Matlab Hai | Krishna Mohan Jha
Episode 1061
इसका क्या मतलब है। कृष्णमोहन झा
ड्योढ़ी के टाट पर
खीरे के पात की हरी छाँह के नीचे
मेरी बाट जोह रही होगी मेरी लालसा...
रात की शाखों से उतरकर रोज़
गिलहरी क…
5 months, 1 week ago