Podcast Episodes
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Zameen Ko Jaadu Aata Hai! | Gulzar
Episode 226
ज़मीं को जादू आता है! | गुलज़ार
ये मेरे बाग की मिट्टी में कुछ तो है
ये जादुई ज़मीं है क्या?
ज़मीं को जादू आता है!
अगर अमरूद बीजूँ मैं, तो ये अमरूद देती …
2 years, 8 months ago
Muhana | Dr Damodar Khadse
Episode 225
मुहाना | डॉ दामोदर खड़से
मैं चाहता हूँ
ज्वालामुखी के मुहाने पर
बैठकर लिखूं कविता...
पर सोचता हूँ
जो लिखता है कविता
क्या नहीं होता वह
ज्वालामुखी के मुहाने …
2 years, 8 months ago
Ma Ka Kargha | Dr Suryabala
Episode 224
माँ का करघा | डॉ सूर्यबाला
हीरे की कनियों से, मोती की लड़ियों से,
चाँदी के तारों, बूटे, लाड़ दुलारों के,
ख़ुशबू के धागों से, आँसू की धारों से
इतने सपने,…
2 years, 8 months ago
Vishwa Ki Vasundhara Suhagini Bani Rahe | Sheoraj Singh 'Bechain'
Episode 223
विश्व की वसुंधरा सुहागिनी बनी रहे | श्यौराज सिंह ‘बेचैन
गगन में सूर्य-चंद्र
और चाँदनी बनी रहे
चमन बना रहे
चमन की स्वामिनी बनी रहे।
कोयलों के
कंठ की माधुरी …
2 years, 8 months ago
Mausiyan | Dr Anamika
Episode 222
मौसियाँ | डॉ अनामिका
वे बारिश में धूप की तरह आती हैं—
थोड़े समय के लिए और अचानक!
हाथ के बुने स्वेटर, इंद्रधनुष, तिल के लड्डू
और सधोर की साड़ी लेकर
वे…
2 years, 8 months ago
Meri Bansuri Meri Bhasha Hai | Shahanshah Alam
Episode 221
मेरी बाँसुरी मेरी भाषा है | शहंशाह आलम | शहंशाह आलम
सुबह उठा तो देर शाम को घर पहुँचा सूरज
चाँद था कि रात भर जागा क़बीले में अथक
हम दिन भर शहरी हुए और रा…
2 years, 8 months ago
Naak | Viren Dangwal
Episode 220
नाक | वीरेन डंगवाल
हस्ती की इस पिपहरी को
यों ही बजाते रहियो मौला!
आवाज़
बनी रहे आख़िर तक साफ-सुथरी-निष्कंप
2 years, 8 months ago
Likhne Ka Arth | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 219
लिखने का अर्थ | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
तुम किसे तलाश रहे हो
इस ढिबरी की रौशनी में, लिखता था प्रेमचंद
इस बेंच पर जाड़े की रातों में, नंगे सोता था निराला…
2 years, 8 months ago
Ab Wahan Ghonsle Hain | Damodar Khadse
Episode 218
अब वहाँ घोंसले हैं | दामोदर खड़से
एक सूखा पेड़
खड़ा था
नदी के किनारे विरक्त
पतझड़ की विभूति लगाए
काल का साक्षी
अंतिम घड़ियों के ख़याल में...
नदी,
वैसे अ…
2 years, 8 months ago
Intezaar | Sahir Ludhianvi
Episode 217
इंतिज़ार | साहिर लुधियानवी
चाँद मद्धम है आसमाँ चुप है
नींद की गोद में जहाँ चुप है
दूर वादी में दूधिया बादल
झुक के पर्बत को प्यार करते हैं
दिल में नाक…
2 years, 8 months ago