Episode Details
Back to Episodes
Kavita | Damodar Khadse
Episode 290
Published 2 years, 6 months ago
Description
कविता | दामोदर खड़से
समय
जब कहीं
गिरवी हो जाता है
साँसें तब
कितनी भारी हो जाती हैं
आसपास दिखता नहीं कुछ भी
केवल देह दौड़ती है
बरसाती बादलों की तरह
हाँफना भी भुला देती है थकान!
ऐसे में तब तुम
कविता की ताबीज
बाँहों पर बाँध लेना!
एक गुनगुनाहट
छोटे-छोटे छंदों की
फुसफुसाहट
शब्दों की दस्तक
और अपनी आहट
भीतर ही भीतर पा लेना!
कविता,
अँधेरी रातों को
चुभती विसंगत बातों को
देगी एक संदेश
और रह-रहकर
टूटता समय
एक लड़ी बनकर
कभी सीढ़ी बनकर
तुम्हारे सामने
जगमगाएगा
देखते-देखते हर गिरवी पल
तुम्हारा अपना हो जाएगा...
कविता का ओर-छोर
तुम अपने हाथों में
जगाए रखना...!