Podcast Episodes
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Lauta Main Is bade Sheher Me | Manglesh Dabral
Episode 238
लौटा मैं इस बड़े शहर में | मंगलेश डबराल
इस बड़े शहर में रहता मैं
एक आदमी अदना-सा था
उस छोटे क़स्बे में गया तो पाया
मेरा क़द बहुत बड़ा था
सभी देखते नज़र…
2 years, 8 months ago
Usha | Shamsher Bahadur Singh
Episode 237
उषा | शमशेर बहादुर सिंह | आरती जैन
प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
[अभी गीला पड़ा है]
बहुत काली सिल ज़रा-से लाल केसर से …
2 years, 8 months ago
Pattiyan Ye Cheed KI | Naresh Saxena
Episode 236
पत्तियाँ यह चीड़ की | नरेश सक्सेना
सींक जैसी सरल और साधारण पत्तियाँ
यदि न होतीं चीड़ की
तो चीड़ कभी इतने सुंदर नहीं होते
नीम या पीपल जैसी आकर्षक
होतीं यद…
2 years, 8 months ago
Kahin Kabhi | Bhuwaneshwar
Episode 235
कहीं कभी | भुवनेश्वर
कहीं कभी सितारे अपने आपकी
आवाज पा लेते हैं और
आसपास उन्हें गुजरते छू लेते हैं…
कहीं कभी रात घुल जाती है
और मेरे जिगर के लाल-लाल
गहरे …
2 years, 8 months ago
Ek Vaakiya | Sahir Ludhianvi
Episode 234
एक वाक़िआ | साहिर लुधियानवी
अँध्यारी रात के आँगन में ये सुब्ह के क़दमों की आहट
ये भीगी भीगी सर्द हवा ये हल्की हल्की धुंदलाहट
गाड़ी में हूँ तन्हा महव-…
2 years, 8 months ago
Safal Aadmi | Bhagwat Rawat
Episode 233
सफल आदमी | भगवत रावत
सफल आदमी के चेहरे पर
उसकी उम्र की जगह लिखा होता है
सफल आदमी
वह नायक बनकर निकलता है अपने बचपन से
और याद करता है उन्हें
जो पड़े रह…
2 years, 8 months ago
Jaise | Arun Kamal
Episode 232
जैसे | अरुण कमल
जैसे
मैं बहुत सारी आवाज़ें नहीं सुन पा रहा हूँ
चींटियों के शक्कर तोड़ने की आवाज़
पंखुड़ी के एक एक कर खुलने की आवाज़
गर्भ में जीवन बूँद गि…
2 years, 8 months ago
Phir Kya Hoga Uske Baad? | Balkrishna Rao
Episode 231
फिर क्या होगा उसके बाद? | बालकृष्ण राव
फिर क्या होगा उसके बाद?
उत्सुक होकर शिशु ने पूछा,
माँ, क्या होगा उसके बाद?
रवि से उज्ज्वल, शशि से सुंदर,
नव कि…
2 years, 8 months ago
Apne Ko Dekhna Chahta Hoon | Chandrakant Devtale
Episode 230
अपने को देखना चाहता हूँ | चंद्रकांत देवताले
मैं अपने को खाते हुए देखना चाहता हूँ
किस जानवर या परिंदे की तरह खाता हूँ मैं
मिट्ठू जैसी हरी मिर्च कुतरता …
2 years, 8 months ago
Prithvi Ka Mangal Ho | Ashok Vajpeyi
Episode 229
पृथ्वी का मंगल हो | अशोक वाजपेयी
सुबह की ठंडी हवा में
अपनी असंख्य हरी रंगतों में
चमक-काँप रही हैं
अनार-नींबू-नीम-सप्रपर्णी-शिरीष-बोगेनबेलिया-जवाकुसुम…
2 years, 8 months ago