Podcast Episodes
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Avikalp | Kinshuk Gupta
Episode 323
(अ)विकल्प | किंशुक गुप्ता
तुम्हारी महत्वकांक्षाओं से माँ
चटक गई है
मेरी रीढ़ की हड्डी
जिस लहज़े से तुमने पिता
सुनाया था फ़रमान
कि रेप में लड़की की गलत…
2 years, 7 months ago
Nat | Rajesh Joshi
Episode 322
नट | राजेश जोशी
दीमकें जगह-जगह से खा चुकी हैं तुम्हारे बाँसों को
भूख खा चुकी है तुम्हारा सारा बदन
क़दमों को साधकर चलते हो जिस रस्सी पर
इस छोर से उस छोर…
2 years, 7 months ago
Basant Aaya | Kedarnath Aggarwal
Episode 321
बसंत आया | केदारनाथ अग्रवाल
बसंत आया :
पलास के बूढ़े वृक्षों ने
टेसू की लाल मौर सिर पर धर ली!
विकराल वनखंडी
लजवंती दुलहिन बन गई,
फूलों के आभूषण पहन आ…
2 years, 7 months ago
Titliyon Ki Bhasha | Mayank Aswal
Episode 320
तितलियों की भाषा | मयंक असवाल
यदि मुझे तितलियों कि भाषा आती
मैं उनसे कहता
तुम्हारी पीठ पर जाकर बैठ जाएं
बिखेर दें अपने पंखों के रंग
जहाँ जहाँ मेरे चुम्…
2 years, 7 months ago
Log Kehte Hain | Mamta Kalia
Episode 319
लोग कहते है | ममता कालिया
लोग कहते हैं
मैं अपना ग़ुस्सा कम करूँ
समझदार औरतों की तरह सहूँ और चुप रहूँ।
ग़ुस्सा कैसे कम किया जाता है?
क्या यह चाट के ऊपर पड़…
2 years, 7 months ago
Ghor Andhkaar Hai | Dr Sheoraj Singh 'Bechain'
Episode 318
घोर अंधकार है | डॉ. श्यौराज सिंह 'बेचैन'
घोर अन्धकार है
बड़ी उदास रात है
न मेल है न प्यार है।
जलाओ दीप साथियो
कि घोर अन्धकार है।
सिसक रहा है चाँद अब
त…
2 years, 7 months ago
Ye Chetavni Hai | Vinod Kumar Shukla
Episode 317
ये चेतावनी है | विनोद कुमार शुक्ल
यह चेतावनी है
कि एक छोटा बच्चा है
यह चेतावनी है
कि चार फूल खिले हैं
यह चेतावनी है
कि खुशी है
और घड़े में भरा हुआ पानी …
2 years, 7 months ago
Kitna Lamba Hoga Jharna | Gulzar
Episode 316
कितना लंबा होगा झरना | गुलज़ार
कितना लंबा होगा झरना
सारा दिन कोहसार पकड़ के नीचे उतरता रहता है
फिर भी ख़त्म नहीं होता...!
सारा दिन ही बादलों में, ये वा…
2 years, 7 months ago
Bada Beta | Kinshuk Gupta
Episode 315
बड़ा बेटा | किंशुक गुप्ता
पिता हृदयाघात से ऐसे गए
जैसे साबुन की घिसी हुई टिकिया
हाथ से छिटक कर गिर जाती है नाली में
या पत्थर लगने से अचानक चली जाती है
मोब…
2 years, 7 months ago
Shamil Hota Hun | Malay
Episode 314
शामिल होता हूँ | मलय
मैं चाँद की तरह
रात के माथे पर
चिपका नहीं हूँ,
ज़मीन में दबा हुआ
गीला हूँ गरम हूँ
फटता हूँ अपने अंदर
अंकुर की उठती ललक को
महसूसता
देखने …
2 years, 7 months ago