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Baarish Ke Kandhe Par Sar rakhta Hun
Episode 342
बारिश के काँधे पर सिर रखता हूँ | शहंशाह आलम
पीड़ा में पेड़ जब दुःख बतियाते हैं दूसरे पेड़ से
मैं बारिश के काँधे पर सिर रखता हूँ अपना
आदमी बमुश्किल दूसरे…
2 years, 6 months ago
Ek Ma Ki Bebasi | Kunwar Narayan
Episode 341
एक माँ की बेबसी | कुँवर नारायण
न जाने किस अदृश्य पड़ोस से
निकल कर आता था वह
खेलने हमारे साथ—
रतन, जो बोल नहीं सकता था
खेलता था हमारे साथ
एक टूटे खिलौ…
2 years, 6 months ago
Ek Ashwasti - Halki Phulki | Prem Vats
Episode 340
एक आश्वस्ति - हल्की फुलकी | प्रेम वत्स
एक हल्का घुला हुआ गुलाबीपन
पंखुरियों की भाँति चिपक-सा जाता है
उसके हल्के रोंयेदार गालों के दोनों उट्ठलों से
जो हल…
2 years, 6 months ago
Amma Bachpan Ko Laut Rahi Hai | Ajay Jugran
Episode 339
अम्मा बचपन को लौट रही है | अजेय जुगरान
उठने को सहारा चाहे
अम्मा बचपन को लौट रही है।
चलने को सहारा चाहे
अम्मा छुटपन को लौट रही है।
बैठने को सहारा चाहे
अम्म…
2 years, 6 months ago
Bhookhdaan | Mehboob
Episode 338
भूखदान | महबूब
शांत अंधेरे सन्नाटे के बीच
चीखती गुजरती एक आवाज़
लोहे के लोहे से टकराने की
या उस भूखे पेट के गुर्राने की
जो लेटा है उसी लोहे के सड़क क…
2 years, 7 months ago
Ye Kaisi Vivashta Hai? | Kunwar Narayan
Episode 337
यह कैसी विवशता है? | कुँवर नारायण
यह कैसी विवशता है—
किसी पर वार करो
वह हँसता रहता
या विवाद करता।
यह कैसी पराजय है—
कहीं घाव करें
रक्त नहीं
केवल मवाद ब…
2 years, 7 months ago
Kya Aapko Prem Pasand Hai | Shraddha Upadhyay
Episode 300
क्या आपको प्रेम पसंद है ? | श्रद्धा उपाध्याय
मैं पहले भी खो गई थी
एक खाई की गहराई के भय में
मैं नहीं सुन पाई थी झरने का संगीत
शोकगीत लिखने की व्यस्तता…
2 years, 7 months ago
Ma | Mamta Kalia
Episode 336
माँ - ममता कालिया
पुराने तख़्त पर यों बैठती हैं
जैसे वह हो सिंहासन बत्तीसी।
हम सब
उनके सामने नीची चौकियों पर टिक जाते हैं
या खड़े रहते हैं अक्सर।
माँ का क…
2 years, 7 months ago
Nritya | Nidhi Sharma
Episode 335
नृत्य - निधि शर्मा
मैं नाचती हूं, अपने दुखों के गीत पर।
मैं मुस्कुराती हूं जब तुम मुझे छोड़ कर चले जाते हो।
मेरे रोम रोम में बजता है विरह का संगीत।
और उ…
2 years, 7 months ago
Thodi Si Umeed Chahiye | Gagan Gill
Episode 334
थोड़ी-सी उम्मीद चाहिए | गगन गिल
जैसे मिट्टी में चमकती
किरण सूर्य की
जैसे पानी में स्वाद
भीगे पत्थर का
जैसे भीगी हुई रेत पर
मछली में तड़पन
थोड़ी-सी उम्मीद च…
2 years, 7 months ago