Podcast Episodes
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Apradh | Leeladhar Jagudi
Episode 288
अपराध | लीलाधर जगूड़ी
जहाँ-जहाँ पर्वतों के माथे थोड़ा चौड़े हो गए हैं
वहीं-वहीं बैठेंगे फूल उगने तक
एक-दूसरे की हथेलियाँ गर्माएँगे
दिग्विजय की ख़ुशी …
2 years, 6 months ago
Sangatkaar | Manglesh Dabral
Episode 287
संगतकार | मंगलेश डबराल
मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती
वह आवाज़ सुंदर कमज़ोर काँपती हुई थी
वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य …
2 years, 6 months ago
Naye Tarah Se | Shashwat Upadhyay
Episode 286
नए तरह से लैस होकर आ गई है नई सदी | शाश्वत उपाध्याय
जो दिख नहीं रही मनिहारिन,
उसके चूड़ियों का बाज़ार
बेड़ियों के भेंट चढ़ गया है।
मोतियों की दुकान से
सी…
2 years, 6 months ago
Pramaan Patra | Archana Verma
Episode 285
प्रमाणपत्र - अर्चना वर्मा
लक्षणों की किताब से उसने
चुन लिया एक रोग
और उसे जीवन का भोग
बना लिया
उसके पास भी था आखिरकार
दिखाने के लिए एक घाव
वह उसे चाव …
2 years, 6 months ago
Ma Ka Chehra | Krishna Kalpit
Episode 284
माँ का चेहरा | कृष्ण कल्पित
जब छीन ली जाएगी हमसे एक-एक स्मृति
जब किसी के पास कुछ नहीं बचेगा
पीतल के तमग़ों के सिवा
जब सब कुछ ठहर जाएगा
एक-एक पत्ता झर …
2 years, 6 months ago
Rekhte Mein Kavita | Uday Prakash
Episode 283
रेखते में कविता | उदय प्रकाश
जैसे कोई हुनरमन्द आज भी
घोड़े की नाल बनाता दीख जाता है
ऊँट की खाल की मसक में जैसे कोई भिश्ती
आज भी पिलाता है जामा मस्जिद…
2 years, 6 months ago
Vastutah | Bhawani Prasad Mishra
Episode 282
वस्तुतः | भवानी प्रसाद मिश्र
मैं जो हूँ
मुझे वही रहना चाहिए।
यानी
वन का वृक्ष
खेत की मेंड़
नदी की लहर
दूर का गीत
व्यतीत
वर्तमान में
उपस्थित भविष्य में
मैं जो हू…
2 years, 6 months ago
Naye Saal Par | Snehamayi Choudhary
Episode 281
नए साल पर | स्नेहमयी चौधरी
दोपहर जिस समय
थोड़ी देर के लिए स्थिर हो जाती है,
चहल-पहल रुकती-सी जान पड़ती है,
उस पार का जंगल गहरा हरा हो उठता है,
अपने क…
2 years, 6 months ago
Haq | Kedarnath Singh
Episode 280
हक़ | केदारनाथ सिंह
पक्षियों को
अपने फैसले खुद लेने दो
उड़ने दो उन्हें हिन्द से पाक
और पाक से
हिन्द के पेड़ों की ओर
अगर सरहद जरूरी है
पड़ी रहने दो उसे
जहाँ …
2 years, 6 months ago
Barbie Aur Sadak | Shashwat Upadhyay
Episode 279
बार्बी और सड़क | शाश्वत उपाध्याय
मुझे मुड़ती हुई सड़कों पर बहुत प्यार आता है
सड़क, जो मेरे बचपन के पसंदीदा बार्बी की कमर की तरह है
बड़े करीने से मुड़…
2 years, 6 months ago