Podcast Episodes
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Gawaiyya | Shahanshah Alam
Episode 298
गवैया | शहंशाह आलम
गवैया अपनी पीड़ा को पूरी लय के साथ गाता है
आज वह न दुःख को बाँधता है न उदासी को
न धूप को न बादल को न अपनी आत्मा को
गवैया सेतु को गाता…
2 years, 6 months ago
Sharton Par Tika Hai Mera Prem | Anupam Singh
Episode 297
शर्तों पर टिका है मेरा प्रेम | अनुपम सिंह
मुझसे प्रेम करने के लिए
तुम्हें शुरू से शुरू करना होगा
पैदा होना होगा स्त्री की कोख से
उसकी और तुम्हारी धड़…
2 years, 6 months ago
Vo Kahan Hain Jo Kavita Likhti Hain | Rupam Mishra
Episode 296
वो कहाँ हैं जो कविता लिखती हैं | रूपम मिश्र
वे बहुत दिन बाद आए हैं
भइया के सखा हैं
तो रवायतन मेरे भइया हैं
किसी पत्रिका में मेरी कविता पढ़ अभिभूत हैं…
2 years, 6 months ago
Purusharth | Shraddha Upadhyay
Episode 295
पुरुषार्थ | श्रद्धा उपाध्याय
क्या पुरुषार्थ के अधिकार क्षेत्र में शामिल हैं
औरतें जो रचाती हैं रास
औरतें जो पकड़ी रहती हैं आस
औरतें जो अग्नि में तप्ती…
2 years, 6 months ago
Mithai Banane Wale | Shashwat Upadhyay
Episode 294
मिठाई बनाने वाले | शाश्वत उपाध्याय
जब दुनिया बनी
तो सबसे पहले बने मिठाई बनाने वाले
हाथों में भर भर के चीनी की परत
परत भी ऐसी वैसी नहीं
एकदम गूलर का फूल छ…
2 years, 6 months ago
Ukti | Suryakant Tripathi 'Nirala'
Episode 293
उक्ति | सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
कुछ न हुआ, न हो।
मुझे विश्व का सुख, श्री, यदि केवल
पास तुम रहो !
मेरे नभ के बादल यदि न कटे—
चंद्र रह गया ढका,
तिमिर…
2 years, 6 months ago
Angor | Jacinta Kerketta
Episode 292
अंगोर | जसिंता केरकेट्टा
शहर का अंगार
जलता है, जलाता है
फिर राख हो जाता है।
गाँव के अंगोर
एक चूल्हे से
जाते हैं दूसरे चूल्हे तक
और सभी चूल्हे सुलग उठत…
2 years, 6 months ago
Hawa Mein Pul | Madan Kashyap
Episode 291
हवा में पुल | मदन कश्यप
हवा में पुल था
इसीलिए हवा का पुल था
क्योंकि हवा का पुल ही
हवा में हो सकता था
(आप चाहें तो इस पाठ को बदल सकते हैं, वह इस प्रकार:…
2 years, 6 months ago
Kavita | Damodar Khadse
Episode 290
कविता | दामोदर खड़से
समय
जब कहीं
गिरवी हो जाता है
साँसें तब
कितनी भारी हो जाती हैं
आसपास दिखता नहीं कुछ भी
केवल देह दौड़ती है
बरसाती बादलों की तरह
हाँफना भी …
2 years, 6 months ago
Laut Ke Wapas Aana | Shrey Karkhur
Episode 289
लौट के वापस आना | श्रेय कारखुर
मेरी भाषा के एक बुजुर्ग कवि ने कहा है
कि घर बाहर जाने के लिए उतना नहीं होता
जितना लौट के वापस आने के लिए होता है
मैंने …
2 years, 6 months ago