Podcast Episodes
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Titliyon Ki Bhasha | Mayank Aswal
Episode 320
तितलियों की भाषा | मयंक असवाल
यदि मुझे तितलियों कि भाषा आती
मैं उनसे कहता
तुम्हारी पीठ पर जाकर बैठ जाएं
बिखेर दें अपने पंखों के रंग
जहाँ जहाँ मेरे चुम्…
2 years, 5 months ago
Log Kehte Hain | Mamta Kalia
Episode 319
लोग कहते है | ममता कालिया
लोग कहते हैं
मैं अपना ग़ुस्सा कम करूँ
समझदार औरतों की तरह सहूँ और चुप रहूँ।
ग़ुस्सा कैसे कम किया जाता है?
क्या यह चाट के ऊपर पड़…
2 years, 5 months ago
Ghor Andhkaar Hai | Dr Sheoraj Singh 'Bechain'
Episode 318
घोर अंधकार है | डॉ. श्यौराज सिंह 'बेचैन'
घोर अन्धकार है
बड़ी उदास रात है
न मेल है न प्यार है।
जलाओ दीप साथियो
कि घोर अन्धकार है।
सिसक रहा है चाँद अब
त…
2 years, 5 months ago
Ye Chetavni Hai | Vinod Kumar Shukla
Episode 317
ये चेतावनी है | विनोद कुमार शुक्ल
यह चेतावनी है
कि एक छोटा बच्चा है
यह चेतावनी है
कि चार फूल खिले हैं
यह चेतावनी है
कि खुशी है
और घड़े में भरा हुआ पानी …
2 years, 5 months ago
Kitna Lamba Hoga Jharna | Gulzar
Episode 316
कितना लंबा होगा झरना | गुलज़ार
कितना लंबा होगा झरना
सारा दिन कोहसार पकड़ के नीचे उतरता रहता है
फिर भी ख़त्म नहीं होता...!
सारा दिन ही बादलों में, ये वा…
2 years, 5 months ago
Bada Beta | Kinshuk Gupta
Episode 315
बड़ा बेटा | किंशुक गुप्ता
पिता हृदयाघात से ऐसे गए
जैसे साबुन की घिसी हुई टिकिया
हाथ से छिटक कर गिर जाती है नाली में
या पत्थर लगने से अचानक चली जाती है
मोब…
2 years, 5 months ago
Shamil Hota Hun | Malay
Episode 314
शामिल होता हूँ | मलय
मैं चाँद की तरह
रात के माथे पर
चिपका नहीं हूँ,
ज़मीन में दबा हुआ
गीला हूँ गरम हूँ
फटता हूँ अपने अंदर
अंकुर की उठती ललक को
महसूसता
देखने …
2 years, 5 months ago
In Sardiyon Mein | Manglesh Dabral
Episode 313
इन सर्दियों में | मंगलेश डबराल
पिछली सर्दियाँ बहुत कठिन थीं
उन्हें याद करने पर मैं इन सर्दियों में भी सिहरता हूँ
हालाँकि इस बार दिन उतने कठोर नहीं
पिछली…
2 years, 5 months ago
Atmahatya | Shashwat Upadhyay
Episode 312
आत्महत्या | शाश्वत उपाध्याय
सात आसमानों के पार आठवें आसमान पर
जहाँ आकर चाँद रुक जाता है
सूरज की रौशनी पर टूटे सपनों के किरचें चमकते हैं
दिन और रात की …
2 years, 5 months ago
Apne Bajaye | Kunwar Narayan
Episode 311
अपने बजाय | कुँवर नारायण
रफ़्तार से जीते
दृश्यों की लीलाप्रद दूरी को लाँघते हुए : या
एक ही कमरे में उड़ते-टूटते लथपथ
दीवारों के बीच
अपने को रोक कर सो…
2 years, 5 months ago