Podcast Episodes
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Uska Chehra | Rajesh Joshi
Episode 402
उसका चेहरा | राजेश जोशी
अचानक गुल हो गयी बत्ती
घुप्प अँधेरा हो गया चारों तरफ
उसने टटोल कर ढूँढी दियासलाई
और एक मोमबत्ती जलाई
आधे अँधेरे और आधे उजाले के ब…
2 years, 4 months ago
Gol Pathar | Naresh Saxena
Episode 401
गोल पत्थर | नरेश सक्सेना
नोकें टूटी होंगी एक-एक कर
तीखापन ख़त्म हुआ होगा
किस-किस से टकराया होगा
कितनी-कितनी बार
पूरी तरह गोल हो जाने से पहले
जब किसी भक्त…
2 years, 4 months ago
Saankal | Rajni Tilak
Episode 400
सांकल | रजनी तिलक
चारदीवारी की घुटन
घूँघट की ओट
सहना ही नारीत्व तो
बदलनी चाहिए परिभाषा।
परम्पराओं का पर्याय
बन चौखट की साँकल
है जीवन-सार
तो बदलना होगा जीवन-…
2 years, 4 months ago
Jharber | Kedarnath Singh
Episode 399
झरबेर | केदारनाथ सिंह
प्रचंड धूप में
इतने दिनों बाद
(कितने दिनों बाद)
मैंने ट्रेन की खिड़की से देखे
कँटीली झाड़ियों पर
पीले-पीले फल
’झरबेर हैं’- मैंने अप…
2 years, 5 months ago
Bachana | Rajesh Joshi
Episode 398
बचाना | राजेश जोशी
एक औरत हथेलियों की ओट में
दीये की काँपती लौ को बुझने से बचा रही है
एक बहुत बूढ़ी औरत कमज़ोर आवाज़ में गुनगुनाते हुए
अपनी छोटी बहू को …
2 years, 5 months ago
Paas Aao Mere | Narendra Kumar
Episode 397
पास आओ मेरे | नरेंद्र कुमार
पास आओ मेरे
मुझे समझाओ ज़रा
ये जो रोम-रोम में तुम्हारे नफ़रत रमी है
तुममें ऐसी क्या कमी है
खुद से पूछो ज़रा
खुद को बताओ ज़रा…
2 years, 5 months ago
Jeevan Nahi Mara Karta Hai | Gopaldas Neeraj
Episode 396
जीवन नहीं मारा करता है | गोपालदस नीरज
छिप छिप अंश्रु बहाने वालों,
मोती व्यर्थ लुटाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है,…
2 years, 5 months ago
Pitaon Ke Baar Mein Kuch Chooti Hui Panktiyan | Kumar Ambuj
Episode 395
पिताओं के बारे में कुछ छूटी हुई पंक्तियाँ | कुमार अम्बुज
एक दिन लगभग सभी पुरुष पिता हो जाते हैं
जो नहीं होते वे भी उम्रदराज़ होकर बच्चों से, युवकों से…
2 years, 5 months ago
Salamat Rahein | Deepika Ghildiyal
Episode 394
सलामत रहें | दीपिका घिल्डियाल
सलामत रहें,
सबके इंद्रधनुष,
जिनके छोर चाहे कभी हाथ ना आएं, फिर भी
सबके खाने के बाद, बची रहे एक रोटी,
ताकि भूखी ना लौटे, दर…
2 years, 5 months ago
Khushamadeed | Gagan Gill
Episode 393
ख़ुशआमदीद | गगन गिल
दोस्त के इंतज़ार में
उसने सारा शहर घूमा
शहर का सबसे सुंदर फूल देखा
शहर की सबसे शांत सड़क सोची
एक क़िताब को छुआ धीरे-धीरे
उसे देने के ल…
2 years, 5 months ago