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Sheetleheri Mein Ek Boodhe Aadmi Ki Prathna | Kedarnath Singh
Episode 360
शीतलहरी में एक बूढ़े आदमी की प्रार्थना | केदारनाथ सिंह
ईश्वर
इस भयानक ठंड में
जहाँ पेड़ के पत्ते तक ठिठुर रहे हैं
मुझे कहाँ मिलेगा वह कोयला
जिस पर इन्स…
2 years, 4 months ago
Tum Apne Rang Me Rang Lo To Holi Hai | Harivansh Rai Bachchan
Episode 359
तुम अपने रँग में रँग लो तो होली है | हरिवंशराय बच्चन
तुम अपने रँग में रँग लो तो होली है।
देखी मैंने बहुत दिनों तक
दुनिया की रंगीनी,
किंतु रही कोरी की कोर…
2 years, 4 months ago
Dharti ka Shaap | Anupam Singh
Episode 358
धरती का शाप | अनुपम सिंह
मौत की ओर अग्रसर है धरती
मुड़-मुड़कर देख रही है पीछे की ओर
उसकी आँखें खोज रही हैं
आदिम पुरखिनों के पद-चिह्न
उन सखियों को खोज …
2 years, 4 months ago
Peet Kamal | Nandkishore Acharya
Episode 357
पीत कमल | नन्दकिशोर आचार्य
जल ही जल की
नीली-दर-नीली गहराई के नीचे
जमे हुए काले दलदल ही दलदल में
अपनी ही पूँछ पर सर टिका कर
सो रहा था वह :
उचटा अचानक …
2 years, 4 months ago
Unka Jeevan | Anupam Singh
Episode 356
उनका जीवन | अनुपम सिंह
ख़ाली कनस्तर-सा उदास दिन
बीतता ही नहीं
रात रज़ाइयों में चीख़ती हैं
कपास की आत्माएँ
जैसे रुइयाँ नहीं
आत्माएँ ही धुनी गई हों
गहर…
2 years, 4 months ago
Lekar Seedha Naara | Shamsher Bahadur Singh
Episode 355
लेकर सीधा नारा | शमशेर बहादुर सिंह
लेकर सीधा नारा
कौन पुकारा
अंतिम आशाओं की संध्याओं से?
पलकें डूबी ही-सी थीं—
पर अभी नहीं;
कोई सुनता-सा था मुझे
कहीं;…
2 years, 4 months ago
Azadi Abhi Adhoori Hai | Sheoraj Singh Bechain
Episode 354
आज़ादी अभी अधूरी है-
सच है यह बात समझ प्यारे।
कुछ सुविधाओं के टुकड़े खा-
मत नौ-नौ बाँस उछल प्यारे।
गोरे गैरों का जुल्म था कल
अब सितम हमारे अपनों का
ये कुछ …
2 years, 4 months ago
Maine Dekha | Jyoti Pandey
Episode 353
मैंने देखा | ज्योति पांडेय
मैंने देखा,
वाष्प को मेघ बनते
और मेघ को जल।
पैरों में पृथ्वी पहन
उल्काओं की सँकरी गलियों में जाते उसे
मैंने देखा।
वह नाप र…
2 years, 4 months ago
Kasautiyan | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 352
कसौटियाँ | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
'जो एक का सत्य है
वही सबका सत्य है'
—यह बात बहुत सीधी थी
लेकिन वे चीजों पर उलटा विचार करते थे
उन्होंने सबके लिए एक आचा…
2 years, 4 months ago
Ziladheesh | Alok Dhanwa
Episode 351
ज़िलाधीश | आलोक धन्वा
तुम एक पिछड़े हुए वक्ता हो।
तुम एक ऐसे विरोध की भाषा में बोलते हो
जैसे राजाओं का विरोध कर रहे हो!
एक ऐसे समय की भाषा
जब संसद का…
2 years, 4 months ago