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Tirohit Sitar | Damodar Khadse
Episode 350
तिरोहित सितार | दामोदर खड़से
खूँखार समय के
घनघोर जंगल में
बहरा एकांत जब
देख नहीं पाता
अपना आसपास...
तब अगली पीढ़ी की देहरी पर
कोई तिरोहित सितार
अपने विस…
2 years, 4 months ago
Seekh | Balraj Sahni
Episode 349
सीख | बलराज साहनी
वैज्ञानिकों का कथन है कि
डरे हुए मनुष्य के शरीर से
एक प्रकार की बास निकलती है
जिसे कुत्ता झट सूँघ लेता है
और काटने दौड़ता है।
और अगर आदम…
2 years, 4 months ago
Kuch Bann Jaate Hain | Uday Prakash
Episode 348
कुछ बन जाते हैं | उदय प्रकाश
कुछ बन जाते हैं
तुम मिसरी की डली बन जाओ
मैं दूध बन जाता हूँ
तुम मुझमें
घुल जाओ।
तुम ढाई साल की बच्ची बन जाओ
मैं मिसरी घुला द…
2 years, 4 months ago
Surya Dhalta Hi Nahi | Ramdarash Mishra
Episode 347
सूर्य ढलता ही नहीं | रामदरश मिश्र | आरती जैन
चाहता हूँ, कुछ लिखूँ, पर कुछ निकलता ही नहीं है
दोस्त, भीतर आपके कोई विकलता ही नहीं है!
आप बैठे हैं अंधेरे म…
2 years, 4 months ago
Tedhi Kamar KI Auratein | Aishwarya Vijay Amrit Raj
Episode 346
टेढ़ी कमर की औरतें | ऐश्वर्य विजय अमृत राज
छः-सात साल की लड़कियाँ
छोटे भाइयों/बड़े भाई के बच्चे के साथ/
सोलह साल की
सालभर पुरानी कन्याएँ
अपने बच्चे/जेठानी…
2 years, 4 months ago
Qile Mein Bacche | Naresh Saxena
Episode 345
क़िले में बच्चे | नरेश सक्सेना
क़िले के फाटक खुले पड़े हैं
और पहरेदार गायब
ड्योढ़ी में चमगादड़ें
दीवाने ख़ास में जाले और
हरम बेपर्दा हैं
सुल्तान दौड़ो…
2 years, 4 months ago
Chunav Ki Chot | Kaka Hathrasi
Episode 344
चुनाव की चोट | काका हाथरसी
हार गए वे, लग गई इलेक्शन में चोट।
अपना अपना भाग्य है, वोटर का क्या खोट?
वोटर का क्या खोट, ज़मानत ज़ब्त हो गई।
उस दिन से ही …
2 years, 4 months ago
Jo Kuch Dekha-Suna, Samjha, Likh Diya | Nirmala Putul
Episode 343
जो कुछ देखा-सुना, समझा, लिख दिया | निर्मला पुतुल
बिना किसी लाग-लपेट के
तुम्हें अच्छा लगे, ना लगे, तुम जानो
चिकनी-चुपड़ी भाषा की उम्मीद न करो मुझसे
जीव…
2 years, 4 months ago
Jo Mere Ghar Kabhi Nahi Ayenge | Vinod Kumar Shukla
Episode 304
जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे | विनोद कुमार शुक्ल
जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे
मैं उनसे मिलने
उनके पास चला जाऊँगा।
एक उफनती नदी कभी नहीं आएगी मेरे घर
नदी जै…
2 years, 4 months ago
Baarish Ke Kandhe Par Sar rakhta Hun
Episode 342
बारिश के काँधे पर सिर रखता हूँ | शहंशाह आलम
पीड़ा में पेड़ जब दुःख बतियाते हैं दूसरे पेड़ से
मैं बारिश के काँधे पर सिर रखता हूँ अपना
आदमी बमुश्किल दूसरे…
2 years, 4 months ago