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Ve Kaise Din They | Kirti Choudhary
Episode 444
वे कैसे दिन थे | कीर्ति चौधरी
वे कैसे दिन थे
जब चीज़ें भागती थीं
और हम स्थिर थे
जैसे ट्रेन के एक डिब्बे में बंद झाँकते हुए
ओझल होते थे दृश्य
पल के पल …
2 years, 3 months ago
Din Bhar | Ramdarash Mishra
Episode 443
दिन भर | रामदरश मिश्रा
आज दिन भर कुछ नहीं किया
सुबह की झील में
एक कंकड़ी मारकर बैठ गया तट पर
और उसमें उठने वाली लहरों को देखता रहा
शाम को लोग घर लौटे तो
न …
2 years, 3 months ago
Aurat Ki Ghulami | Sheoraj Singh 'Bechain'
Episode 442
औरत की गुलामी | डॉ श्योराज सिंह ‘बेचैन’
किसी आँख में लहू है-
किसी आँख में पानी है।
औरत की गुलामी भी-
एक लम्बी कहानी है।
पैदा हुई थी जिस दिन-
घर शोक में डू…
2 years, 3 months ago
Chal Insha Apne Gaon Mein | Ibn e Insha
Episode 441
चल इंशा अपने गाँव में | इब्ने इंशा
यहाँ उजले उजले रूप बहुत
पर असली कम, बहरूप बहुत
इस पेड़ के नीचे क्या रुकना
जहाँ साये कम,धूप बहुत
चल इंशा अपने गाँव में
बे…
2 years, 3 months ago
Saat Panktiyan | Manglesh Dabral
Episode 440
सात पंक्तियाँ - मंगलेश डबराल
मुश्किल से हाथ लगी एक सरल पंक्ति
एक दूसरी बेडौल-सी पंक्ति में समा गई
उसने तीसरी जर्जर क़िस्म की पंक्ति को धक्का दिया
इस तरह…
2 years, 3 months ago
Bahurupiya | Madan Kashyap
Episode 439
बहुरूपिया | मदन कश्यप
जब वह पास आया
तो पाँव में प्लास्टिक की चप्पल देखकर
एकदम से हँसी फूट पड़ी
फिर लगा
भला कैसे संभव है
महानगर की क्रूर सड़कों पर नंगे पा…
2 years, 3 months ago
Ik Roz Doodh Ne Ki Pani Se Paak Ulfat | Unknown
Episode 447
इक रोज़ दूध ने की पानी से पाक उल्फ़त | अज्ञात
इक रोज़ दूध ने की, पानी से पाक उल्फ़त
इक ज़ात हो गए वो, मिल-जुल के भाई भाई
इनमें बढ़ी वो उल्फ़त, एक रंग ह…
2 years, 3 months ago
Arrey Ab Aisi Kavita Likho | Raghuvir Sahay
Episode 434
अरे अब ऐसी कविता लिखो | रघुवीर सहाय
अरे अब ऐसी कविता लिखो
कि जिसमें छंद घूमकर आय
घुमड़ता जाय देह में दर्द
कहीं पर एक बार ठहराय
कि जिसमें एक प्रतिज्ञा करूं…
2 years, 3 months ago
Prem Karna Ya Phasna | Rupam Mishra
Episode 436
प्रेम करना या फंसना - रूपम मिश्रा
हम दोनों नए-नए प्रेम में थे
उसके हाथ में महँगा-सा फोन था और बाँह में औसत-सी मैं
फोन में कई खूबसूरत लड़कियों की तसवीरे…
2 years, 3 months ago
Rin Phoolon Sa | Sunita Jain
Episode 435
ऋण फूलों-सा | सुनीता जैन
इस काया को
जिस माया ने
जन्म दिया,
वह माँग रही-कि
जैसे उत्सव के बाद
दीवारों पर
हाथों के थापे रह जाते
जैसे पूजा के बाद
चौरे के आसपास
पैर…
2 years, 3 months ago