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Aakhri Kavita | Imroz
Episode 465
आख़िरी कविता | इमरोज़
अनुवाद : अमिया कुँवर
जन्म के साथ
मेरी क़िस्मत नहीं लिखी गई
जवानी में लिखी गई
और वह भी कविता में...
जो मैंने अब पढ़ी है
पर तू क्यो…
2 years, 2 months ago
Kivaad | Kumar Ambuj
Episode 464
किवाड़ | कुमार अम्बुज
ये सिर्फ़ किवाड़ नहीं हैं
जब ये हिलते हैं
माँ हिल जाती है
और चौकस आँखों से
देखती है—‘क्या हुआ?’
मोटी साँकल की
चार कड़ियों में
एक…
2 years, 2 months ago
Likhne Se Hi Likhi Jaati Hai Kavita | Udayan Vajpeyi
Episode 463
लिखने से ही लिखी जाती है कविता | उदयन वाजपेयी
लिखने से ही लिखी जाती है कविता
प्रेम भी करने की ही चीज़ है
जैसे जंगल सुनने की
किताब डूबने की
मृत्यु इंतज…
2 years, 3 months ago
Sirf Mohabbat Hi Mazhab Hai Har Sacche Insaan Ka | Lakshmi Shankar Vajpeyi
Episode 462
सिर्फ मोहब्बत ही मज़हब है हर सच्चे इंसान का | लक्ष्मीशंकर वाजपेयी
माँ की ममता, फूल की खुशबू,
बच्चे की मुस्कान का
सिर्फ़ मोहब्बत ही मज़हब है
हर सच्चे इं…
2 years, 3 months ago
Umr | Hemant Deolekar
Episode 461
उम्र - हेमंत देवलेकर
तुम कितने साल की हो
डिंबू ?
"तीन साल की”
"और तुम्हारी मम्मी ?"
"तीन साल की"
"और पापा?"
"तीन साल"
अचानक मुझे यह दुनिया
कच्चे टमाटर सी लग…
2 years, 3 months ago
Kavi Log | Rituraj
Episode 460
कवि लोग | ऋतुराज
कवि लोग बहुत लंबी उमर जीते हैं
मारे जा रहे होते हैं
फिर भी जीते हैं
कृतघ्न समय में मूर्खों और लंपटों के साथ
निभाते अपनी दोस्ती
उनके …
2 years, 3 months ago
Parinde Par Kavi Ko Pehchante Hain | Rajesh Joshi
Episode 459
परिन्दे पर कवि को पहचानते हैं - राजेश जोशी
सालिम अली की क़िताबें पढ़ते हुए
मैंने परिन्दों को पहचानना सीखा।
और उनका पीछा करने लगा
पाँव में जंज़ीर न होती …
2 years, 3 months ago
Ek Tinka | Ayodhya Singh Upadhyay 'Hari Oudh'
Episode 458
एक तिनका | अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
मैं घमण्डों में भरा ऐंठा हुआ।
एक दिन जब था मुण्डेरे पर खड़ा।
आ अचानक दूर से उड़ता हुआ।
एक तिनका आँख में मेरी पड…
2 years, 3 months ago
Bahut dinon ke baad | Nagarjun
Episode 457
बहुत दिनों के बाद | नागार्जुन
बहुत दिनों के बाद
अबकी मैंने जी भर देखी
पकी-सुनहली फ़सलों की मुस्कान
- बहुत दिनों के बाद
बहुत दिनों के बाद
अबकी मैं जी भ…
2 years, 3 months ago
Uth Jaag Musafir | Vanshidhar Shukla
Episode 455
उठ जाग मुसाफ़िर | वंशीधर शुक्ल
उठ जाग मुसाफ़िर! भोर भई,
अब रैन कहाँ जो सोवत है।
जो सोवत है सो खोवत है,
जो जागत है सो पावत है।
उठ जाग मुसाफ़िर! भोर भई,…
2 years, 3 months ago