Podcast Episodes
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Maut Ik Geet Raat Gaati Thi | Firaq Gorakhpuri
Episode 454
मौत इक गीत रात गाती थी
ज़िन्दगी झूम झूम जाती थी
ज़िक्र था रंग-ओ-बू का और दिल में
तेरी तस्वीर उतरती जाती थी
वो तिरा ग़म हो या ग़म-ए-आफ़ाक़
शम्मअ सी दिल मे…
2 years, 3 months ago
Sir Chupane Ki Jagah | Rajesh Joshi
Episode 453
सिर छिपाने की जगह | राजेश जोशी
न उन्होंने कुंडी खड़खड़ाई न दरवाज़े पर लगी घंटी बजाई
अचानक घर के अन्दर तक चले आए वे लोग
उनके सिर और कपड़े कुछ भीगे हुए …
2 years, 3 months ago
Mere Bete | Kavita Kadambari
Episode 452
मेरे बेटे | कविता कादम्बरी
मेरे बेटे
कभी इतने ऊँचे मत होना
कि कंधे पर सिर रखकर कोई रोना चाहे तो
उ…
2 years, 3 months ago
Baad Ke Dinon Mein Premikayein | Rupam Mishra
Episode 451
बाद के दिनों में प्रेमिकाएँ | रूपम मिश्रा
बाद के दिनों में प्रेमिकाएँ पत्नियाँ बन गईं
वे सहेजने लगीं प्रेमी को जैसे मुफलिसी के दिनों में अम्मा घी की …
2 years, 3 months ago
Ishwar Aur Pyaz | Kedarnath Singh
Episode 450
ईश्वर और प्याज़ | केदारनाथ सिंह
क्या ईश्वर प्याज़ खाता है?
एक दिन माँ ने मुझसे पूछा
जब मैं लंच से पहले
प्याज़ के छिलके उतार रहा था
क्यों नहीं माँ मैंने क…
2 years, 3 months ago
Anant Janmon Ki Katha | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 449
अनंत जन्मों की कथा | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
मुझे याद है
अपने अनंत जन्मों की कथा
पिता ने उपेक्षा की
सती हुई मैं
चक्र से कटे मेरे अंग-प्रत्यंग
जन्मदात्री म…
2 years, 3 months ago
Khul Kar | Nandkishore Acharya
Episode 448
खुल कर | नंदकिशोर आचार्य
खुल कर हो रही बारिश
खुल कर नहाना चाहती लड़की
अपनी खुली छत पर।
किन्तु लोगों की खुली आँखें
उसको बन्द रखती हैं
खुल कर हो रही
बरसात मे…
2 years, 3 months ago
Janna Zaroori Hai | Indu Jain
Episode 438
जानना ज़रूरी है | इन्दु जैन
जब वक्त कम रह जाए
तो जानना ज़रूरी है कि
क्या ज़रूरी है
सिर्फ़ चाहिए के बदले चाहना
पहचानना कि कहां हैं हाथ में हाथ दिए दोनों
मुख…
2 years, 3 months ago
Hum Aur Log | Kedarnath Agarwal
Episode 446
हम ओर लोग | केदारनाथ अग्रवाल
हम
बड़े नहीं
फिर भी बड़े हैं
इसलिए कि
लोग जहाँ गिर पड़े हैं
हम वहाँ तने खड़े हैं
द्वन्द की
लड़ाई भी
साहस से लड़े हैं;
न दुख से ड…
2 years, 3 months ago
Baarish Ki Bhasha | Shahanshah Alam
Episode 445
बारिश की भाषा | शहंशाह आलम
उसकी देह कितनी बातूनी लग रही है
जो बारिश से बचने की ख़ातिर खड़ी है
जामुन पेड़ के नीचे जामुनी रंग के कपड़े में
‘जामुन ख़रीदकर …
2 years, 3 months ago