Podcast Episodes
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Prem Mein Main Aur Tum | Anshu Kumar
Episode 475
प्रेम में मैं और तुम | अंशू कुमार
एक दिन तुम और मैं
जब अपनी अपनी धुरी पर
लौट रहे होंगे
ख़ाली हाथ, बेआवाज़ और बदहवास
अपने-अपने हिस्से के सुख और दुःख लि…
2 years, 2 months ago
Baarish Ya Punyavarsha | Arunabh Saurabh
Episode 474
बारिश या पुण्यवर्षा | अरुणाभ सौरभ
धरती पर गिरती
बूँदें बारिश की
छोटी - छोटी
ये बूँद-बूँद गोलाइयाँ
धरती को चुंबन है
आकाश का
या धरती से
आकाश के
मिलने का सबूत
या…
2 years, 2 months ago
Jagat Ke Kuchle Hue Path | Harishankar Parsai
Episode 473
जगत के कुचले हुए पथ पर भला कैसे चलूं मैं? | हरिशंकर परसाई
किसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझको
नहीं है पद चिह्न का आधार भी दरकार मुझको
ले निराला म…
2 years, 2 months ago
Akaal Aur Uske Baad | Nagarjun
Episode 472
अकाल और उसके बाद | नागार्जुन
कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई …
2 years, 2 months ago
Santaan Saate | Nilesh Raghuvanshi
Episode 471
संतान साते - नीलेश रघुवंशी
माँ परिक्रमा कर रही होगी पेड़ की
हम परिक्रमा कर रहे हैं पराये शहर की
जहाँ हमारी इच्छाएँ दबती ही जा रही हैं ।
सात पुए और सात प…
2 years, 2 months ago
Jo Hua Vo Hua Kis Liye | Nida Fazli
Episode 470
जो हुआ वो हुआ किसलिए | निदा फ़ाज़ली
जो हुआ वो हुआ किसलिए
हो गया तो गिला किसलिए
काम तो हैं ज़मीं पर बहुत
आसमाँ पर ख़ुदा किसलिए
एक ही थी सुकूँ की जगह
घर में …
2 years, 2 months ago
Bachao | Uday Prakash
Episode 469
बचाओ - उदय प्रकाश
चिंता करो मूर्द्धन्य 'ष' की
किसी तरह बचा सको तो बचा लो ‘ङ’
देखो, कौन चुरा कर लिये चला जा रहा है खड़ी पाई
और नागरी के सारे अंक
जाने कहाँ…
2 years, 2 months ago
Jab Main Tera Geet Likhne Lagi
Episode 468
जब मैं तेरा गीत लिखने लगी/अमृता प्रीतम
मेरे शहर ने जब तेरे कदम छुए
सितारों की मुट्ठियाँ भरकर
आसमान ने निछावर कर दीं
दिल के घाट पर मेला जुड़ा ,
ज्यूँ रातें…
2 years, 2 months ago
Telephone Par Pita Ki Awaz | Nilesh Raghuvanshi
Episode 467
टेलीफ़ोन पर पिता की आवाज़ - नीलेश रघुवंशी
टेलीफ़ोन पर
थरथराती है पिता की आवाज़
दिये की लौ की तरह काँपती-सी।
दूर से आती हुई
छिपाये बेचैनी और दुख।
टेलीफ़ोन …
2 years, 2 months ago
Saamya | Naresh Saxena
Episode 456
साम्य | नरेश सक्सेना
समुद्र के निर्जन विस्तार को देखकर
वैसा ही डर लगता है
जैसा रेगिस्तान को देखकर
समुद्र और रेगिस्तान में अजीब साम्य है
दोनों ही होते हें…
2 years, 2 months ago