Episode Details
Back to Episodes
Saamya | Naresh Saxena
Episode 456
Published 2 years, 2 months ago
Description
साम्य | नरेश सक्सेना
समुद्र के निर्जन विस्तार को देखकर
वैसा ही डर लगता है
जैसा रेगिस्तान को देखकर
समुद्र और रेगिस्तान में अजीब साम्य है
दोनों ही होते हें विशाल
लहरों से भरे हुए
और दोनों ही
भटके हुए आदमी को मारते हैं
प्यासा।