Podcast Episodes
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Tum Hansi Ho | Agyeya
Episode 484
तुम हँसी हो | अज्ञेय
तुम हँसी हो - जो न मेरे होंठ पर दीखे,
मुझे हर मोड़ पर मिलती रही है।
धूप - मुझ पर जो न छाई हो,
किंतु जिसकी ओर
मेरे रुद्ध जीवन की क…
2 years, 2 months ago
Choolhe Ke Paas | Madan Kashyap
Episode 483
चूल्हे के पास - मदन कश्यप
गीली लकड़ियों को फूँक मारती
आँसू और पसीने से लथपथ
चूल्हे के पास बैठी है औरत
हज़ारों-हज़ार बरसों से
धुएँ में डूबी हुई
चूल्हे के …
2 years, 2 months ago
Koi Aadmi Mamuli Nahi Hota | Kunwar Narayan
Episode 482
कोर्ई आदमी मामूली नहीं होता | कुंवर नारायण
अकसर मेरा सामना हो जाता
इस आम सचाई से
कि कोई आदमी मामूली नहीं होता
कि कोई आदमी ग़ैरमामूली नहीं होता
आम तौर पर,…
2 years, 2 months ago
Bazaar | Anamika
Episode 481
बाज़ार | अनामिका
सुख ढूँढ़ा,
गैया के पीछे बछड़े जैसा
दुःख चला आया!
जीवन के साथ बँधी
मृत्यु चली आई!
दिन के पीछे डोलती आई
रात बाल खोले हुई।
प्रेम के पीछ…
2 years, 2 months ago
Ma | Damodar Khadse
Episode 480
माँ - दामोदर खड़से
नदी सदियों से बह रही है
इसका संगीत पीढ़ियों को
लुभा रहा है
आकांक्षाओं और आस्थाओं के संगम पर वह
धीमी हो जाती है...
उफनती है आकांक्षा…
2 years, 2 months ago
Har Taraf Har Jagah Beshumar Aadmi | Nida Fazli
Episode 479
हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी | निदा फ़ाज़ली
हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाईयों का शिकार आदमी
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का ख़ुद मज़…
2 years, 2 months ago
Baadal Raag | Awadhesh Kumar
Episode 478
बादल राग | अवधेश कुमार
बादल इतने ठोस हों
कि सिर पटकने को जी चाहे
पर्वत कपास की तरह कोमल हों
ताकि उन पर सिर टिका कर सो सकें
झरने आँसुओं की तरह धाराप्रव…
2 years, 2 months ago
Samay Aur Bachpan | Hemant Deolekar
Episode 477
समय और बचपन - हेमंत देवलेकर
उसने मेरी कलाई पर
टिक टिक करती घड़ी देखी
तो मचल उठी वैसी ही घड़ी पाने के लिए
उसका जी बहलाते
स्थिर समय की एक खिलौना घड़ी
बाँध द…
2 years, 2 months ago
Barson Ke Baad | Girija Kumar Mathur
Episode 476
बरसों के बाद | गिरिजा कुमार माथुर
बरसों के बाद कभी
हम-तुम यदि मिलें कहीं
देखें कुछ परिचित-से
लेकिन पहिचाने ना।
याद भी न आये नाम
रूप, रंग, काम, धाम
सोचें यह…
2 years, 2 months ago
Prem Mein Main Aur Tum | Anshu Kumar
Episode 475
प्रेम में मैं और तुम | अंशू कुमार
एक दिन तुम और मैं
जब अपनी अपनी धुरी पर
लौट रहे होंगे
ख़ाली हाथ, बेआवाज़ और बदहवास
अपने-अपने हिस्से के सुख और दुःख लि…
2 years, 2 months ago