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Saat Panktiyan | Manglesh Dabral
Episode 440
सात पंक्तियाँ - मंगलेश डबराल
मुश्किल से हाथ लगी एक सरल पंक्ति
एक दूसरी बेडौल-सी पंक्ति में समा गई
उसने तीसरी जर्जर क़िस्म की पंक्ति को धक्का दिया
इस तरह…
2 years, 1 month ago
Bahurupiya | Madan Kashyap
Episode 439
बहुरूपिया | मदन कश्यप
जब वह पास आया
तो पाँव में प्लास्टिक की चप्पल देखकर
एकदम से हँसी फूट पड़ी
फिर लगा
भला कैसे संभव है
महानगर की क्रूर सड़कों पर नंगे पा…
2 years, 1 month ago
Ik Roz Doodh Ne Ki Pani Se Paak Ulfat | Unknown
Episode 447
इक रोज़ दूध ने की पानी से पाक उल्फ़त | अज्ञात
इक रोज़ दूध ने की, पानी से पाक उल्फ़त
इक ज़ात हो गए वो, मिल-जुल के भाई भाई
इनमें बढ़ी वो उल्फ़त, एक रंग ह…
2 years, 1 month ago
Arrey Ab Aisi Kavita Likho | Raghuvir Sahay
Episode 434
अरे अब ऐसी कविता लिखो | रघुवीर सहाय
अरे अब ऐसी कविता लिखो
कि जिसमें छंद घूमकर आय
घुमड़ता जाय देह में दर्द
कहीं पर एक बार ठहराय
कि जिसमें एक प्रतिज्ञा करूं…
2 years, 1 month ago
Prem Karna Ya Phasna | Rupam Mishra
Episode 436
प्रेम करना या फंसना - रूपम मिश्रा
हम दोनों नए-नए प्रेम में थे
उसके हाथ में महँगा-सा फोन था और बाँह में औसत-सी मैं
फोन में कई खूबसूरत लड़कियों की तसवीरे…
2 years, 1 month ago
Rin Phoolon Sa | Sunita Jain
Episode 435
ऋण फूलों-सा | सुनीता जैन
इस काया को
जिस माया ने
जन्म दिया,
वह माँग रही-कि
जैसे उत्सव के बाद
दीवारों पर
हाथों के थापे रह जाते
जैसे पूजा के बाद
चौरे के आसपास
पैर…
2 years, 1 month ago
Saath Chalte Chalte Tum | Rashmi Pathak
Episode 437
साथ चलते चलते तुम | रश्मि पाठक
तुम बहुत आगे
निकल गए
जाने कितना समय
लगेगा तुम तक
पहुँचने में
सोचती थी कैसे कटेंगे
ये पल छिन
बीत गया एक
बर…
2 years, 1 month ago
Filhaal | Uday Prakash
Episode 433
फ़िलहाल | उदय प्रकाश
एक गत्ते का आदमी
बन गया था लौहपुरुष
बलात्कारी हो चुका था सन्त
व्यभिचारी विद्वान
चापलूस क्रान्तिकारी
मदारी को घोषित कर दिया गया था
युग-…
2 years, 1 month ago
Kavita Ke Liye | Snehmayi Chaudhary
Episode 432
कविता के लिए | स्नेहमयी चौधरी
कविता लिखने के लिए जो परेशान करते थे
उन सबको मैंने धीरे-धीरे अपने से काट दिया।
जैसे : ज़रा सी बात पर
बड़ी देर तक घुमड़ते…
2 years, 1 month ago
Jo Maar Kha Royi Nahin | Vishnu Khare
Episode 431
जो मार खा रोईं नहीं | विष्णु खरे
तिलक मार्ग थाने के सामने
जो बिजली का एक बड़ा बक्स है
उसके पीछे नाली पर बनी झु्ग्गी का वाक़या है यह
चालीस के क़रीब उम्र क…
2 years, 1 month ago