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Hum Na Rahenge | Kedarnath Agarwal
Episode 506
हम न रहेंगे | केदारनाथ अग्रवाल
हम न रहेंगे-
तब भी तो यह खेत रहेंगे;
इन खेतों पर घन घहराते
शेष रहेंगे;
जीवन देते,
प्यास बुझाते,
माटी को मद-मस्त बनाते,
श्याम …
2 years, 1 month ago
Tan Gayi Reedh | Nagarjun
Episode 505
तन गई रीढ़ | नागार्जुन
झुकी पीठ को मिला
किसी हथेली का स्पर्श
तन गई रीढ़
महसूस हुई कन्धों को
पीछे से,
किसी नाक की सहज उष्ण निराकुल साँसें
तन गई रीढ़
कौंधी कही…
2 years, 1 month ago
Mrityu | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 504
मृत्यु - विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
मेरे जन्म के साथ ही हुआ था
उसका भी जन्म...
मेरी ही काया में पुष्ट होते रहे
उसके भी अंग
में जीवन-भर सँवारता रहा जिन्हें
औ…
2 years, 1 month ago
Ichhaon Ka Ghar | Anjana Bhatt
Episode 503
इच्छाओं का घर | अंजना भट्ट
इच्छाओं का घर- कहाँ है?
क्या है मेरा मन या मस्तिष्क या फिर मेरी सुप्त चेतना?
इच्छाएं हैं भरपूर, जोरदार और कुछ मजबूर
पर किसने …
2 years, 1 month ago
Swadesh Ke Prati | Subhadra Kumari Chauhan
Episode 508
स्वदेश के प्रति / सुभद्राकुमारी चौहान
आ, स्वतंत्र प्यारे स्वदेश आ,
स्वागत करती हूँ तेरा।
तुझे देखकर आज हो रहा,
दूना प्रमुदित मन मेरा॥
आ, उस बालक के समान
जो…
2 years, 1 month ago
Apni Devnagri Lipi | Kedarnath Singh
Episode 501
अपनी देवनागरी लिपि | केदारनाथ सिंह
यह जो सीधी-सी, सरल-सी
अपनी लिपि है देवनागरी
इतनी सरल है
कि भूल गई है अपना सारा अतीत
पर मेरा ख़याल है
'क' किसी कुल्हाड़ी …
2 years, 1 month ago
Dhela | Uday Prakash
Episode 500
ढेला | उदय प्रकाश
वह था क्या एक ढेला था
कहीं दूर गाँव-देहात से फिंका चला आया था
दिल्ली की ओर
रोता था कड़कड़डूमा, मंगोलपुरी, पटपड़गंज में
खून के आँसू चुपच…
2 years, 1 month ago
O Mandir Ke Shankh, Ghantiyon | Ankit Kavyansh
Episode 499
ओ मन्दिर के शंख, घण्टियों | अंकित काव्यांश
ओ मन्दिर के शंख, घण्टियों तुम तो बहुत पास रहते हो,
सच बतलाना क्या पत्थर का ही केवल ईश्वर रहता है?
मुझे मिली अ…
2 years, 1 month ago
Tum Aayin | Kedarnath Singh
Episode 498
तुम आईं | केदारनाथ सिंह
तुम आईं
जैसे छीमियों में धीरे- धीरे
आता है रस
जैसे चलते-चलते एड़ी में
काँटा जाए धँस
तुम दिखीं
जैसे कोई बच्चा
सुन रहा हो कहानी
तुम हँस…
2 years, 1 month ago
Raat Kati Din Tara Tara | Shiv Kumar Batalvi
Episode 497
रात कटी गिन तारा तारा - शिव कुमार बटालवी
अनुवाद: आकाश 'अर्श'
रात कटी गिन तारा तारा
हुआ है दिल का दर्द सहारा
रात फुंका मिरा सीना ऐसा
पार अर्श के गया शर…
2 years, 1 month ago