Podcast Episodes
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Ek Baar Jo | Ashok Vajpeyi
Episode 502
एक बार जो | अशोक वाजपेयी
एक बार जो ढल जाएँगे
शायद ही फिर खिल पाएँगे।
फूल शब्द या प्रेम
पंख स्वप्न या याद
जीवन से जब छूट गए तो
फिर न वापस आएँगे।
अभी बचाने य…
2 years, 1 month ago
Aangan | Ramdarash Mishra
Episode 515
आँगन | रामदरश मिश्रा
तने हुए दो पड़ोसी दरवाज़े
एक-दूसरे की आँखों में आँखें धँसाकर
गुर्राते रहे कुत्तों की तरह
फेंकते रहे आग और धुआँ भरे शब्दों का कोलाह…
2 years, 1 month ago
Shabd Jo Parinde Hain | Nasira Sharma
Episode 514
शब्द जो परिंदे हैं | नासिरा शर्मा
शब्द जो परिंदे हैं।
उड़ते हैं खुले आसमान और खुले ज़हनों में
जिनकी आमद से हो जाती है, दिल की कंदीलें रौशन।
अक्षरों को …
2 years, 1 month ago
Bache Hue Shabd | Madan Kashyap
Episode 513
बचे हुए शब्द | मदन कश्यप
जितने शब्द आ पाते हैं कविता में उससे कहीं ज़्यादा छूट जाते हैं।
बचे हुए शब्द छपछप करते रहते हैं
मेरी आत्मा के निकट बह रहे पनसो…
2 years, 1 month ago
Parichay | Anjana Tandon
Episode 512
परिचय | अंजना टंडन
अब तक
हर देह के ताने बाने पर
स्थित है
जुलाहे की ऊँगलियों के निशान
बस थोड़ा सा अंदर
रूह तक
जा धँसे हैं,
विश्वास ना हो
तो कभी
किसी की
रूह की द…
2 years, 1 month ago
Surya | Naresh Saxena
Episode 511
सूर्य | नरेश सक्सेना
ऊर्जा से भरे लेकिन
अक्ल से लाचार, अपने भुवनभास्कर
इंच भर भी हिल नहीं पाते
कि सुलगा दें किसी का सर्द चुल्हा
ठेल उढ़का हुआ दरवाजा
चाय भर…
2 years, 1 month ago
Ladki | Pratibha Saxena
Episode 510
लड़की | प्रतिभा सक्सेना
आती है एक लड़की,
मगन-मुस्कराती,
खिलखिलाकर हँसती है,
सब चौंक उठते हैं -
क्यों हँसी लड़की ?
उसे क्या पता आगे का हाल,
प्रसन्न भावनाओं …
2 years, 1 month ago
Jarkhareed Deh | Rupam Mishra
Episode 509
जरखरीद देह - रूपम मिश्र
हम एक ही पटकथा के पात्र थे
एक ही कहानी कहते हुए हम दोनों अलग-अलग दृश्य में होते
जैसे एक दृश्य तुम देखते हुए कहते तुमसे कभी मिल…
2 years, 1 month ago
Khalipan | Vinay Kumar Singh
Episode 507
ख़ालीपन | विनय कुमार सिंह
माँ अंदर से उदास है
सब कुछ वैसा ही नहीं है
जो बाहर से दिख रहा है
वैसे तो घर भरा हुआ है
सब हंस रहे हैं
खाने की खुशबू आ रही है
शाम…
2 years, 1 month ago
Hum Na Rahenge | Kedarnath Agarwal
Episode 506
हम न रहेंगे | केदारनाथ अग्रवाल
हम न रहेंगे-
तब भी तो यह खेत रहेंगे;
इन खेतों पर घन घहराते
शेष रहेंगे;
जीवन देते,
प्यास बुझाते,
माटी को मद-मस्त बनाते,
श्याम …
2 years, 1 month ago