Podcast Episodes
Back to Search
Ishwar Aur Pyaz | Kedarnath Singh
Episode 450
ईश्वर और प्याज़ | केदारनाथ सिंह
क्या ईश्वर प्याज़ खाता है?
एक दिन माँ ने मुझसे पूछा
जब मैं लंच से पहले
प्याज़ के छिलके उतार रहा था
क्यों नहीं माँ मैंने क…
2 years, 1 month ago
Anant Janmon Ki Katha | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 449
अनंत जन्मों की कथा | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
मुझे याद है
अपने अनंत जन्मों की कथा
पिता ने उपेक्षा की
सती हुई मैं
चक्र से कटे मेरे अंग-प्रत्यंग
जन्मदात्री म…
2 years, 1 month ago
Khul Kar | Nandkishore Acharya
Episode 448
खुल कर | नंदकिशोर आचार्य
खुल कर हो रही बारिश
खुल कर नहाना चाहती लड़की
अपनी खुली छत पर।
किन्तु लोगों की खुली आँखें
उसको बन्द रखती हैं
खुल कर हो रही
बरसात मे…
2 years, 1 month ago
Janna Zaroori Hai | Indu Jain
Episode 438
जानना ज़रूरी है | इन्दु जैन
जब वक्त कम रह जाए
तो जानना ज़रूरी है कि
क्या ज़रूरी है
सिर्फ़ चाहिए के बदले चाहना
पहचानना कि कहां हैं हाथ में हाथ दिए दोनों
मुख…
2 years, 1 month ago
Hum Aur Log | Kedarnath Agarwal
Episode 446
हम ओर लोग | केदारनाथ अग्रवाल
हम
बड़े नहीं
फिर भी बड़े हैं
इसलिए कि
लोग जहाँ गिर पड़े हैं
हम वहाँ तने खड़े हैं
द्वन्द की
लड़ाई भी
साहस से लड़े हैं;
न दुख से ड…
2 years, 1 month ago
Baarish Ki Bhasha | Shahanshah Alam
Episode 445
बारिश की भाषा | शहंशाह आलम
उसकी देह कितनी बातूनी लग रही है
जो बारिश से बचने की ख़ातिर खड़ी है
जामुन पेड़ के नीचे जामुनी रंग के कपड़े में
‘जामुन ख़रीदकर …
2 years, 1 month ago
Ve Kaise Din They | Kirti Choudhary
Episode 444
वे कैसे दिन थे | कीर्ति चौधरी
वे कैसे दिन थे
जब चीज़ें भागती थीं
और हम स्थिर थे
जैसे ट्रेन के एक डिब्बे में बंद झाँकते हुए
ओझल होते थे दृश्य
पल के पल …
2 years, 1 month ago
Din Bhar | Ramdarash Mishra
Episode 443
दिन भर | रामदरश मिश्रा
आज दिन भर कुछ नहीं किया
सुबह की झील में
एक कंकड़ी मारकर बैठ गया तट पर
और उसमें उठने वाली लहरों को देखता रहा
शाम को लोग घर लौटे तो
न …
2 years, 1 month ago
Aurat Ki Ghulami | Sheoraj Singh 'Bechain'
Episode 442
औरत की गुलामी | डॉ श्योराज सिंह ‘बेचैन’
किसी आँख में लहू है-
किसी आँख में पानी है।
औरत की गुलामी भी-
एक लम्बी कहानी है।
पैदा हुई थी जिस दिन-
घर शोक में डू…
2 years, 1 month ago
Chal Insha Apne Gaon Mein | Ibn e Insha
Episode 441
चल इंशा अपने गाँव में | इब्ने इंशा
यहाँ उजले उजले रूप बहुत
पर असली कम, बहरूप बहुत
इस पेड़ के नीचे क्या रुकना
जहाँ साये कम,धूप बहुत
चल इंशा अपने गाँव में
बे…
2 years, 1 month ago