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Pita Ke Ghar Me | Rupam Mishra
Episode 525
पिता के घर में | रूपम मिश्रा
पिता क्या मैं तुम्हें याद हूँ!
मुझे तो तुम याद रहते हो
क्योंकि ये हमेशा मुझे याद कराया गया
फासीवाद मुझे कभी किताब से नहीं सम…
2 years, 1 month ago
Paas | Ashok Vajpeyi
Episode 524
पास | अशोक वाजपेयी
पत्थर के पास था वृक्ष
वृक्ष के पास थी झाड़ी
झाड़ी के पास थी घास
घास के पास थी धरती
धरती के पास थी ऊँची चट्टान
चट्टान के पास था क़िले का…
2 years, 1 month ago
Padhakku Ka Soojh | Ramdhari Singh 'Dinkar'
Episode 523
पढ़क्कू की सूझ | रामधारी सिंह "दिनकर"
एक पढ़क्कू बड़े तेज थे, तर्कशास्त्र पढ़ते थे,
जहाँ न कोई बात, वहाँ भी नए बात गढ़ते थे।
एक रोज़ वे पड़े फिक्र में …
2 years, 1 month ago
Dhahai | Prashant Purohit
Episode 522
ढहाई | प्रशांत पुरोहित
उसने पहले मेरे घर के
दरवाज़े को तोड़ा,
छज्जे को पटका फिर,
बालकनी को टहोका,
अब दीवारों का नम्बर आया,
तो उन्हें भी गिराया,
मेरे छोटे …
2 years, 1 month ago
Us Roz Bhi | Achal Vajpeyi
Episode 521
उस रोज़ भी | अचल वाजपेयी
उस रोज़ भी रोज़ की तरह
लोग वह मिट्टी खोदते रहे
जो प्रकृति से वंध्या थी
उस आकाश की गरिमा पर
प्रार्थनाएँ गाते रहे
जो जन्मजात बहरा …
2 years, 1 month ago
Ye Kiska Ghar Hai | Ramdarash Mishra
Episode 520
यह किसका घर है? | रामदरश मिश्रा
"यह किसका घर है?"
"हिन्दू का।"
"यह किसका घर है?"
"मुसलमान का।"
यह किसका घर है?"
"ईसाई का।”
शाम होने को आयी
सवेरे से ही भटक र…
2 years, 1 month ago
Ek Aashirwad | Dushyant Kumar
Episode 519
एक आशीर्वाद | दुष्यंत कुमार
जा तेरे स्वप्न बड़े हों।
भावना की गोद से उतर कर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें।
चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये
रूठना मचलना…
2 years, 1 month ago
Baarish Mein Joote Ke Bina Nikalta Hun Ghar Se | Shahanshah Alam
Episode 518
बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से | शहंशाह आलम
बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से
बचपन में हम सब कितनी दफ़ा निकल जाते थे
घर से नंगे पाँव बार…
2 years, 1 month ago
Kumhaar Akela Shaks Hota Hai | Shahanshah Alam
Episode 517
कुम्हार अकेला शख़्स होता है | शहंशाह आलम
जब तक एक भी कुम्हार है
जीवन से भरे इस भूतल पर
और मिट्टी आकार ले रही है
समझो कि मंगलकामनाएं की जा रही हैं
नदियों…
2 years, 1 month ago
Sagar Se Milkar Jaise | Bhavani Prasad Mishra
Episode 516
सागर से मिलकर जैसे / भवानीप्रसाद मिश्र
सागर से मिलकर जैसे
नदी खारी हो जाती है
तबीयत वैसे ही
भारी हो जाती है मेरी
सम्पन्नों से मिलकर
व्यक्ति से मिलने का
अनुभ…
2 years, 1 month ago