Podcast Episodes
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Umr | Hemant Deolekar
Episode 461
उम्र - हेमंत देवलेकर
तुम कितने साल की हो
डिंबू ?
"तीन साल की”
"और तुम्हारी मम्मी ?"
"तीन साल की"
"और पापा?"
"तीन साल"
अचानक मुझे यह दुनिया
कच्चे टमाटर सी लग…
2 years ago
Kavi Log | Rituraj
Episode 460
कवि लोग | ऋतुराज
कवि लोग बहुत लंबी उमर जीते हैं
मारे जा रहे होते हैं
फिर भी जीते हैं
कृतघ्न समय में मूर्खों और लंपटों के साथ
निभाते अपनी दोस्ती
उनके …
2 years, 1 month ago
Parinde Par Kavi Ko Pehchante Hain | Rajesh Joshi
Episode 459
परिन्दे पर कवि को पहचानते हैं - राजेश जोशी
सालिम अली की क़िताबें पढ़ते हुए
मैंने परिन्दों को पहचानना सीखा।
और उनका पीछा करने लगा
पाँव में जंज़ीर न होती …
2 years, 1 month ago
Ek Tinka | Ayodhya Singh Upadhyay 'Hari Oudh'
Episode 458
एक तिनका | अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
मैं घमण्डों में भरा ऐंठा हुआ।
एक दिन जब था मुण्डेरे पर खड़ा।
आ अचानक दूर से उड़ता हुआ।
एक तिनका आँख में मेरी पड…
2 years, 1 month ago
Bahut dinon ke baad | Nagarjun
Episode 457
बहुत दिनों के बाद | नागार्जुन
बहुत दिनों के बाद
अबकी मैंने जी भर देखी
पकी-सुनहली फ़सलों की मुस्कान
- बहुत दिनों के बाद
बहुत दिनों के बाद
अबकी मैं जी भ…
2 years, 1 month ago
Uth Jaag Musafir | Vanshidhar Shukla
Episode 455
उठ जाग मुसाफ़िर | वंशीधर शुक्ल
उठ जाग मुसाफ़िर! भोर भई,
अब रैन कहाँ जो सोवत है।
जो सोवत है सो खोवत है,
जो जागत है सो पावत है।
उठ जाग मुसाफ़िर! भोर भई,…
2 years, 1 month ago
Maut Ik Geet Raat Gaati Thi | Firaq Gorakhpuri
Episode 454
मौत इक गीत रात गाती थी
ज़िन्दगी झूम झूम जाती थी
ज़िक्र था रंग-ओ-बू का और दिल में
तेरी तस्वीर उतरती जाती थी
वो तिरा ग़म हो या ग़म-ए-आफ़ाक़
शम्मअ सी दिल मे…
2 years, 1 month ago
Sir Chupane Ki Jagah | Rajesh Joshi
Episode 453
सिर छिपाने की जगह | राजेश जोशी
न उन्होंने कुंडी खड़खड़ाई न दरवाज़े पर लगी घंटी बजाई
अचानक घर के अन्दर तक चले आए वे लोग
उनके सिर और कपड़े कुछ भीगे हुए …
2 years, 1 month ago
Mere Bete | Kavita Kadambari
Episode 452
मेरे बेटे | कविता कादम्बरी
मेरे बेटे
कभी इतने ऊँचे मत होना
कि कंधे पर सिर रखकर कोई रोना चाहे तो
उ…
2 years, 1 month ago
Baad Ke Dinon Mein Premikayein | Rupam Mishra
Episode 451
बाद के दिनों में प्रेमिकाएँ | रूपम मिश्रा
बाद के दिनों में प्रेमिकाएँ पत्नियाँ बन गईं
वे सहेजने लगीं प्रेमी को जैसे मुफलिसी के दिनों में अम्मा घी की …
2 years, 1 month ago