Podcast Episodes
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Santaan Saate | Nilesh Raghuvanshi
Episode 471
संतान साते - नीलेश रघुवंशी
माँ परिक्रमा कर रही होगी पेड़ की
हम परिक्रमा कर रहे हैं पराये शहर की
जहाँ हमारी इच्छाएँ दबती ही जा रही हैं ।
सात पुए और सात प…
2 years ago
Jo Hua Vo Hua Kis Liye | Nida Fazli
Episode 470
जो हुआ वो हुआ किसलिए | निदा फ़ाज़ली
जो हुआ वो हुआ किसलिए
हो गया तो गिला किसलिए
काम तो हैं ज़मीं पर बहुत
आसमाँ पर ख़ुदा किसलिए
एक ही थी सुकूँ की जगह
घर में …
2 years ago
Bachao | Uday Prakash
Episode 469
बचाओ - उदय प्रकाश
चिंता करो मूर्द्धन्य 'ष' की
किसी तरह बचा सको तो बचा लो ‘ङ’
देखो, कौन चुरा कर लिये चला जा रहा है खड़ी पाई
और नागरी के सारे अंक
जाने कहाँ…
2 years ago
Jab Main Tera Geet Likhne Lagi
Episode 468
जब मैं तेरा गीत लिखने लगी/अमृता प्रीतम
मेरे शहर ने जब तेरे कदम छुए
सितारों की मुट्ठियाँ भरकर
आसमान ने निछावर कर दीं
दिल के घाट पर मेला जुड़ा ,
ज्यूँ रातें…
2 years ago
Telephone Par Pita Ki Awaz | Nilesh Raghuvanshi
Episode 467
टेलीफ़ोन पर पिता की आवाज़ - नीलेश रघुवंशी
टेलीफ़ोन पर
थरथराती है पिता की आवाज़
दिये की लौ की तरह काँपती-सी।
दूर से आती हुई
छिपाये बेचैनी और दुख।
टेलीफ़ोन …
2 years ago
Saamya | Naresh Saxena
Episode 456
साम्य | नरेश सक्सेना
समुद्र के निर्जन विस्तार को देखकर
वैसा ही डर लगता है
जैसा रेगिस्तान को देखकर
समुद्र और रेगिस्तान में अजीब साम्य है
दोनों ही होते हें…
2 years ago
Nani Ki Kahani Mein Devraj Indra | Arunabh Saurabh
Episode 466
नानी की कहानी में देवराज इन्द्र - अरुणाभ सौरभ
कठोरतम तप से
किसी साधक को
मिलने लगेगी सिद्धि
तो आपका स्वर्ग सिंहासन
डोल जाएगा देवराज
बचपन में आपसे
नानी की कह…
2 years ago
Aakhri Kavita | Imroz
Episode 465
आख़िरी कविता | इमरोज़
अनुवाद : अमिया कुँवर
जन्म के साथ
मेरी क़िस्मत नहीं लिखी गई
जवानी में लिखी गई
और वह भी कविता में...
जो मैंने अब पढ़ी है
पर तू क्यो…
2 years ago
Kivaad | Kumar Ambuj
Episode 464
किवाड़ | कुमार अम्बुज
ये सिर्फ़ किवाड़ नहीं हैं
जब ये हिलते हैं
माँ हिल जाती है
और चौकस आँखों से
देखती है—‘क्या हुआ?’
मोटी साँकल की
चार कड़ियों में
एक…
2 years ago
Likhne Se Hi Likhi Jaati Hai Kavita | Udayan Vajpeyi
Episode 463
लिखने से ही लिखी जाती है कविता | उदयन वाजपेयी
लिखने से ही लिखी जाती है कविता
प्रेम भी करने की ही चीज़ है
जैसे जंगल सुनने की
किताब डूबने की
मृत्यु इंतज…
2 years ago