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Registan Ki Raat Hai | Deepti Naval
Episode 535
रेगिस्तान की रात है / दीप्ति नवल
रेगिस्तान की रात है
और आँधियाँ सी
बनते जाते हैं निशां
मिटते जाते हैं निशां
दो अकेले से क़दम
ना कोई रहनुमां
ना कोई हमसफ़र
रेत…
2 years ago
Ped Aur Patte | Adarsh Kumar Mishra
Episode 534
पैड़ और पत्ते | आदर्श कुमार मिश्र
पेड़ से पत्ते टूट रहे हैं
पेड़ अकेला रहता है,
उड़ - उड़कर पते दूर गए हैं
पेड़ अकेला रहता है,
कुछ पत्तों के नाम बड़े हैं…
2 years ago
Main Isliye Likh Raha Hun | Achyutanand Mishra
Episode 533
मैं इसलिए लिख रहा हूं | अच्युतानंद मिश्र
मैं इसलिए लिख रहा हूं
कि मेरे हाथ काट दिए जाएं
मैं इसलिए लिख रहा हूं
कि मेरे हाथ
तुम्हारे हाथों से मिलकर
उन हाथों …
2 years ago
Lok Malhar | Dr Sheoraj Singh 'Bechain'
Episode 532
लोक मल्हार | डॉ श्योराज सिंह 'बेचैन'
सुन बहिना!
मेरे जियरबा की बात
उदासी मेरे मन बसी।
सैंया तलाशें री बहना नौकरी
देवर स्वप्न में फिल्मी छोकरी।
मेरी बहिना,…
2 years ago
Khushi Kaisa Durbhagya | Manglesh Dabral
Episode 531
खुशी कैसा दुर्भाग्य | मगलेश डबराल
जिसने कुछ रचा नहीं समाज में
उसी का हो चला समाज
वही है नियन्ता जो कहता है तोडँगा अभी और भी कुछ
जो है खूँखार हँसी है उसक…
2 years ago
Chupchap Ullas | Bhawani Prasad Mishra
Episode 530
चुपचाप उल्लास | भवानीप्रसाद मिश्र
हम रात देर तक
बात करते रहे
जैसे दोस्त
बहुत दिनों के बाद
मिलने पर करते हैं
और झरते हैं
जैसे उनके आस पास
उनके पुराने
गाँव के स…
2 years ago
Seene Me Kya Hai Tumhare | Akshay Upadhyay
Episode 529
सीने में क्या है तुम्हारे / अक्षय उपाध्याय
कितने सूरज हैं तुम्हारे सीने में
कितनी नदियाँ हैं
कितने झरने हैं
कितने पहाड़ हैं तुम्हारी देह में
कितनी गुफ़ाएँ…
2 years ago
Bhookh | Achyutanand Mishra
Episode 528
भूख / अच्युतानंद मिश्र
मेरी माँ अभी मरी नहीं
उसकी सूखी झुलसी हुई छाती
और अपनी फटी हुई जेब
अक्सर मेरे
सपनों में आती हैं
मेरी नींद उचट जाती है
मैं सोचने लगता …
2 years ago
Khejadi Se Ugi Ho | Nandkishore Acharya
Episode 527
खेजड़ी-सी उगी हो | नंदकिशोर आचार्य
खेजड़ी-सी उगी हो मुझ में
हरियल खेजड़ी सी तुम
सूने, रेतीले विस्तार में :
तुम्हीं में से फूट आया हूँ
ताज़ी, घनी पत्तियों…
2 years ago
Raat Yun Kehne Laga Mujhse Gagan Ka Chand | Ramdhari Singh 'Dinkar'
Episode 526
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद / रामधारी सिंह "दिनकर"
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है!
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँ…
2 years ago