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In Sardiyon Mein | Manglesh Dabral
Episode 313
इन सर्दियों में | मंगलेश डबराल
पिछली सर्दियाँ बहुत कठिन थीं
उन्हें याद करने पर मैं इन सर्दियों में भी सिहरता हूँ
हालाँकि इस बार दिन उतने कठोर नहीं
पिछली…
2 years, 7 months ago
Atmahatya | Shashwat Upadhyay
Episode 312
आत्महत्या | शाश्वत उपाध्याय
सात आसमानों के पार आठवें आसमान पर
जहाँ आकर चाँद रुक जाता है
सूरज की रौशनी पर टूटे सपनों के किरचें चमकते हैं
दिन और रात की …
2 years, 7 months ago
Apne Bajaye | Kunwar Narayan
Episode 311
अपने बजाय | कुँवर नारायण
रफ़्तार से जीते
दृश्यों की लीलाप्रद दूरी को लाँघते हुए : या
एक ही कमरे में उड़ते-टूटते लथपथ
दीवारों के बीच
अपने को रोक कर सो…
2 years, 7 months ago
Band Kamre Mein | Prabha Khaitan
Episode 310
बन्द कमरे में | प्रभा खेतान
बन्द कमरे में
मेरी सब चीज़ें अपना परिचय खोने लगती हैं
दीवारों के रंग धूमिल
नीले पर्दे फीके
छत पर घूमता पंखा
गतिहीन।
तब मैं निकल…
2 years, 8 months ago
Atmasweekar | Gaurav Singh
Episode 309
आत्मस्वीकार | गौरव सिंह
जो अपराध मैंने किये,
वो जीवन जीने की न्यूनतम ज़रूरत की तरह लगे!
मैंने चोर निगाहों से स्त्रियों के वक्ष देखे
और कई बार एक लड़की का…
2 years, 8 months ago
Chattan Ko Todo, Vah Sunder Ho Jayegi
Episode 308
चट्टान को तोड़ो वह सुंदर हो जाएगी | केदारनाथ सिंह
चट्टान को तोड़ो
वह सुंदर हो जाएगी
उसे और तोड़ो
वह और, और सुंदर होती जाएगी
अब उसे उठाओ
रख लो कंधे पर…
2 years, 8 months ago
Achanak Nahi Gayi Ma | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 305
अचानक नहीं गई माँ | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
अचानक नहीं गई माँ
जैसे चला जाता है टोंटी का पानी
या तानाशाह का सिंहासन
थोड़ा-थोड़ा रोज गई वह
जैसे जाती है …
2 years, 8 months ago
Sach Choocha Hota Hai | Amitava Kumar
Episode 307
सच छूछा होता है।- अमिताव कुमार
महात्मा गाँधी की आत्मकथा में
मौसम का कहीं ज़िक्र नहीं,
लंदन की किसी ईमारत या
सड़क के बारे में कोई बयान नहीं,
किसी कमरे की,…
2 years, 8 months ago
Gaon Gaya Tha, Gaon Se Bhaaga | Kailash Gautam
Episode 303
गाँव गया था, गाँव से भागा | कैलाश गौतम
गाँव गया था
गाँव से भागा।
रामराज का हाल देखकर
पंचायत की चाल देखकर
आँगन में दीवाल देखकर
सिर पर आती डाल देखकर
नदी का प…
2 years, 8 months ago
Kavi Ki Atmahatya | Devansh Ekant
Episode 302
कवि की आत्महत्या | देवांश एकांत
अभिनेता अभिनय करते-करते
मृत्यु का मंचन करने लगता है
आप उन्मत्त होते हैं अभिनय देख
पीटना चाहते हैं तालियाँ
मगर इस बार वह…
2 years, 8 months ago