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Sangatkaar | Manglesh Dabral

Sangatkaar | Manglesh Dabral

Episode 287 Published 2 years, 6 months ago
Description

संगतकार | मंगलेश डबराल


मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती 

वह आवाज़ सुंदर कमज़ोर काँपती हुई थी 

वह मुख्य गायक का छोटा भाई है 

या उसका शिष्य 

या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार 

मुख्य गायक की गरज में 

वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीन काल से 

गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में 

खो चुका होता है 

या अपने ही सरगम को लाँघकर 

चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में 

तब संगतकार ही स्थाई को सँभाले रहता है 

जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान 

जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन 

जब वह नौसिखिया था


तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला 

प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ 

आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ 

तभी मुख्य गायक हो ढाढ़स बंधाता 

कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर 

कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ 

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है 

और यह कि फिर से गाया जा सकता है 

गाया जा चुका राग 

और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है 

यों अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है 

उसे विफलता नहीं 

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

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