Podcast Episodes
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Abhinay | Manglesh Dabral
Episode 1142
अभिनय । मंगलेश डबराल
एक गहन आत्मविश्वास से भरकर
सुबह निकल पड़ता हूँ घर से
ताकि सारा दिन आश्वस्त रह सकूँ
एक आदमी से मिलते हुए मुस्कराता हूँ
वह एकाएक देख ले…
4 months, 2 weeks ago
Baat Yah Nahi Hai | Teji Grover
Episode 1141
बात यह नहीं है । तेजी ग्रोवर
बात यह नहीं है कि कहीं भी मन नहीं लगता,
कहीं भी जड़ महसूस नहीं होती,
कहीं भी अकेलापन साथ नहीं छोड़ता।
बात ठीक इससे उलट है।…
4 months, 2 weeks ago
Haan Dost | Agyeya
Episode 1140
हाँ, दोस्त। अज्ञेय
हाँ, दोस्त,
तुम ने पहाड़ की पगडंडी चुनी
और मैं ने सागर की लहर।
पहाड़ की पगडंडी :
सँकरी, पथरीली,
ढाँटी,पर स्पष्ट लक्ष्य की ओर जाती हुई :
म…
4 months, 2 weeks ago
Seedhi | Padmaja Sharma
Episode 1139
सीढ़ी । पद्मजा शर्मा
जो किसी को
सीढ़ी बनाकर
ऊपर चढ़ रहे हैं
वह मुझसे कह रहे हैं
तुम कमज़ोर हो
कब से खड़ी हो
बीच रास्ते
हट जाओ
वे नहीं जानते
कि सीढ़ी के हटते ही…
4 months, 2 weeks ago
Lekar Seedha Naara | Shamsher Bahadur Singh
Episode 1138
लेकर सीधा नारा। शमशेर बहादुर सिंह
लेकर सीधा नारा
कौन पुकारा
अंतिम आशाओं की संध्याओं से?
पलकें डूबी ही-सी थीं -
पर अभी नहीं;
कोई सुनता-सा था मुझे
कहीं;
फिर क…
4 months, 3 weeks ago
Pasand Ki Jane Wali Stree | Savita Singh
Episode 1137
पसन्द की जाने वाली स्त्री । सविता सिंह
प्रेम करती हुई स्त्री ही अब भी पसन्द की जाती है
छल में भी एक अजीब जादू है
जो झूठ में नहीं
कितना मिलता-जुलता है झ…
4 months, 3 weeks ago
Kis Jane Kis Ki Pyas Bujhane Kidhar Gayin | Kaifi Azmi
Episode 1136
क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं । कैफ़ी आज़मी
क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं
इस सर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गईं
दीवाना पूछता है ये लहरों …
4 months, 3 weeks ago
Choolha | Tanwir Sheikh 'Ilham'
Episode 1135
चूल्हा । तनवीर शेख़ 'इल्हाम’
चूल्हे ने संभाला
पितृसत्ता को
और बनाएं रखा अपना वर्चस्व
ये चूल्हा
स्त्रियों के ऊपर
ऐसे स्थापित किया गया
जो पुरुषों के रौब को
आ…
4 months, 3 weeks ago
Wo Ladke Kaun They | Gautam Kumar
Episode 1134
वो लड़के कौन थे | गौतम कुमार
ख़ामोशी तोड़ो
क्यों देखते हो
अगली बारिश की राह
क्यों कर रहे हो
अपनी मिट्टी से उठने वाली सौंधी ख़ुशबू का इंतज़ार
अब कौन-सी फ़सल…
4 months, 3 weeks ago
Roop Naran Ke Tat Par | Rabindranath Tagore | Translation - Hans Kumar Tiwari
Episode 1133
रूप-नारान के तट पर । रवींद्रनाथ टैगोर
अनुवाद : हंसकुमार तिवारी
रूप-नारान के तट पर
जाग उठा मैं।
जाना, यह जगत्
सपना नहीं है।
लहू के अक्षरों में लिखा
अपना रूप…
4 months, 3 weeks ago