Podcast Episodes
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Ek Abhineta Ki Thakaan | Agney
Episode 1162
एक अभिनेता की थकान। आग्नेय
वह रंगमंच पर जा चुका है
वह अपनी भूमिका पूरी कर चुका है
उतार दी है पोशाक
उस चरित्र की जिसका अभिनय किया उसने
वह नहीं जानता
जब वह र…
3 months, 4 weeks ago
Yah Number Maujood Nahi Hai | Manglesh Dabral
Episode 1161
यह नंबर मौजूद नहीं । मंगलेश डबराल
दिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्ट
जहाँ भी जाता हूँ जो भी फ़ोन मिलाता हूँ
अक्सर एक बेगानी-सी आवाज़ सुनाई देती है
दिस नंबर डज़ …
3 months, 4 weeks ago
Tum Ho | Nazim Hikmat
Episode 1160
तुम हो । नाज़िम हिकमत
अनुवाद : सुरेश सलिल
तुम्हीं मेरी ग़ुलामी हो, तुम्हीं मेरी आज़ादी
गर्मियों की किसी बेलिबास रात की तरह मेरा जिस्म
मेरा वतन हो तुम
पन्…
4 months ago
Sankatgrasth | Vivek Nirala
Episode 1159
संकटग्रस्त। विवेक निराला
भूमंडलीकरण के इस युग में
संकट ही संकट थे
स्थानीय लोग कुछ वैश्विक संकटों से जूझ रहे थे
और वैश्विक लोग स्थानीय संकटों से।
मेरा…
4 months ago
Ped | Omprakash Valmiki
Episode 1158
पेड़ । ओमप्रकाश वाल्मीकि
पेड़
तुम पेड़ उसी वक़्त तक
पेड़ हो,
जब तक ये हरे पत्ते
हिल रहे हैं
तुम्हारी टहनियों पर।
पेड़,
तुम्हारा हरापन उसी वक़्त तक है
जब तक ये…
4 months ago
Tum Muskurana | Anurag Tiwari
Episode 1157
तुम मुस्कुराना । अनुराग तिवारी
चाहे जैसी स्थितियां हो
हालात चाहे कैसे हो
दुख हो, निराशा हो
या फिर झूठी आशा हो
विफलता या असफलता हो
या फिर घोर विकलता हो
संताप…
4 months ago
Mohabbat Mein Der Ho Sakti Hai | Zeeshan Sahil
Episode 1156
मोहब्बत में देर हो सकती है। ज़ीशान साहिल
जब तुम मुझे सुनो
ये कहते हुए
एक ख़ूब-सूरत लड़की पे मरना
कितना आसान है
और उसी के लिए मर जाना
मैं पसंद करता हूँ
और इस…
4 months ago
Shabd | Kamala Das | Translation - Ranjana Mishra
Episode 1155
शब्द / कमला दास
अनुवाद. - रंजना मिश्रा
मेरे चारों और शब्द, शब्द, शब्द हैं
वे मुझपर पत्तों की तरह उगते हैं
ऐसा लगता है वे कभी मेरे भीतर
धीमे धीमे उगना बन्…
4 months ago
Ek Aur Dhang | Shrikant Verma
Episode 1154
एक और ढंग। श्रीकांत वर्मा
भागकर अकेलेपन से अपने
तुममें मैं गया।
सुविधा के कई वर्ष
तुममें व्यतीत किए।
कैसे?
कुछ स्मरण नहीं।
मैं और तुम! अपनी दिनचर्या के
पृष्ठ…
4 months ago
Ma | Amitabh
Episode 1153
माँ । अमिताभ
हालाँकि मैं सबसे छोटा था
ग़रीब दुर्बल
पर माँ सर्वाधिक मेरे हिस्से में आई
मैं ही था उसका अशिष्ट सेवक
लापरवाह प्रेमी
मैं ही अकेला चूम सकता था उस…
4 months ago