Podcast Episodes
Back to Search
Ichhayein | Asteek Vajpeyi
Episode 1182
इच्छाएँ । आस्तीक वाजपेयी
लकड़ी की अलमारी पर धूल,
उनसे चिपकी दीवार पर टँगी इच्छाएँ।
जैसे मैं अलमारी को,
वैसे पूरी न हुई इच्छाएँ मुझे,
झाड़ने आती हैं।
3 months, 1 week ago
Zindagi Jab Bhi Teri Bazm Mein | Shahryar
Episode 1181
ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें । शहरयार
ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें
सुर्ख़ फूलों से महक…
3 months, 1 week ago
Milan | Bharat Bhushan Aggarwal
Episode 1180
मिलन । भारतभूषण अग्रवाल
छलक कर आई न पलकों पर विगत पहचान,
मुस्कुरा पाया न ओठों पर प्रणय का गान;
ज्यों जुड़ीं आँखें, मुड़ीं तुम, चल पड़ा मैं मूक -
इस मिलन …
3 months, 1 week ago
Diya | Om Prakash Valmiki
Episode 1179
दिया । ओमप्रकाश वाल्मीकि
कच्चे घर में
जलते दीए की रोशनी पर
क़ब्ज़ा करके बैठ गए हो तुम।
लौ के ठीक ऊपर काला धुआँ है।
जो पर्त दर-पर्त
कालिख पोत रहा है
दीवार प…
3 months, 1 week ago
Mobile | Manglesh Dabral
Episode 1178
मोबाइल । मंगलेश डबराल
वे गले में सोने की मोटी जंज़ीर पहनते हैं
कमर में चौड़ी बेल्ट लगाते हैं
और मोबाइलों पर बात करते हैं
वे एक आधे अँधेरे और आधे उजले रेस…
3 months, 1 week ago
Ve Kaise Din The | Kirti Chowdhary
Episode 1177
वे कैसे दिन थे। कीर्ति चौधरी
वे कैसे दिन थे
जब चीज़ें भागती थीं
और हम स्थिर थे
जैसे ट्रेन के एक डिब्बे में बंद झाँकते हुए
ओझल होते थे दृश्य
पल के पल में—
..…
3 months, 1 week ago
Hey Meri Uttara | Ashutosh Sharma
Episode 1176
हे मेरी उत्तरा! । आशुतोष शर्मा
मेरे शस्त्र की धारमयी रति को
तुम्हारी भाषा के वैराग्य ने छीन लिया था
हे मेरी उत्तरा!
मेरे रण में जाने से पूर्व
तुम्हारे ऑँ…
3 months, 2 weeks ago
Ladna | Pawan Karan
Episode 1175
लड़ना। पवन करण
मुझे उन सबकी ख़ूब याद आती है
जिन्होंने मुझसे कई बार कहा
कि मुझे लड़ना चाहिए
मैं उन सबको कभी भूल नहीं पाता
जो मुझसे हमेशा कहते रहे कि मुझे
ल…
3 months, 2 weeks ago
Pahadi Baccha | Nirmala Putul
Episode 1174
पहाड़ी बच्चा । निर्मला पुतुल
पहाड़ की गोद में
पहाड़ के छोटे-छोटे टुकड़ों सा
खेलता है पहाड़ी बच्चा
लड़खड़ाते कदमों से पहाड़ चढ़ते
रोपता है पहाड़ी ध…
3 months, 2 weeks ago
Chupke Se Idhar Aa Jao | Shahryar
Episode 1173
चुपके से इधर आ जाओ । शहरयार
दरवाज़ा-ए-जाँ से हो कर
चुपके से इधर आ जाओ
इस बर्फ़ भरी बोरी को
पीछे की तरफ़ सरकाओ
हर घाव पे बोसे छिड़को
हर ज़ख़्म को तुम सहलाओ
म…
3 months, 2 weeks ago