Podcast Episodes
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Laut Te Nahi Pita | Kumar Divyanshu Shekhar
Episode 1192
लौटते नहीं पिता । कुमार दिव्यनशु शेखर
नीम-अँधेरे घर से निकले पिता
अँधेरे से पहले लौट आने की बात दोहरा के।
लौटी एक ख़बर
लौटा एक एम्बुलेस।
नीम-अँधेरे निकले…
2 months, 4 weeks ago
Hulchal | Anurag Tiwari
Episode 1191
हलचल। अनुराग तिवारी
तेज़ कुछ भी हो सकता है
किंतु
सबसे तेज़ क्या है
चीते की चाल
बाज़ की नज़र
नहीं।
सबसे तेज़ हलचल होती है
जैसे आज एक हलचल हुई,
मेरी आहट से दी…
2 months, 4 weeks ago
Bacha Rahe Humare Beech Ka Ishwar | Arun Kumar Singh
Episode 1190
बचा रहे हमारे बीच का ईश्वर । अरुण कुमार सिंह
तुम जागती करवटों से लिखते हो कोई नाम
सुबह चादर बूँद-बूँद निचोड़ती है अपनी पीड़ा
बहेलिए ने मारा फिर कैद की…
3 months ago
Chaton Par Ladkiyan | Alok Dhanwa
Episode 1189
छतों पर लड़कियाँ । आलोक धन्वा
अब भी
छतों पर आती हैं लड़कियाँ
मेरी ज़िंदगी पर पड़ती हैं उनकी परछाइयाँ।
गो कि लड़कियाँ आयी हैं उन लड़कों के लिए
जो नीचे गलि…
3 months ago
Hoke Mayoos Na Yun Sham Se Dhalte Rahiye | Kunwar Bechain
Episode 1188
हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए। कुंवर बेचैन
हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए
ज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए
एक ही ठाँव पे ठहरेंगे तो थक जाएँग…
3 months ago
Stree Ki Neend | Nilesh Raghuvanshi
Episode 1187
स्त्री की नींद। नीलेश रघुवंशी
एक छोटे से डाकखाने में
वो स्त्री अपनी सीट पर इतनी उदास इतनी अकेली
समय उसके आसपास नहीं होता ऊँघते और झपकियाँ लेते
एक ही गल…
3 months ago
Parantu | Kumar Ambuj
Episode 1186
परंतु । कुमार अम्बुज
बुद्धिजीवी भी सड़क पर आ सकते हैं
परंतु क्या करें यह सरकार ठीक नहीं है
माना कि यह लोकतंत्र है
और हम सुधारना चाहते हैं यह समाज
परंतु इध…
3 months ago
Kitab Ke Phool | Tanwir Sheikh 'Ilham'
Episode 1185
किताब के फूल । तनवीर शेख़ 'इल्हाम’
जब भी
अपने प्रेमिका को
देना गुलाब
देना संग किताबें भी
ताकी उन किताबों में
उस गुलाब को संजो सके
तुम्हारे दिए खतों को
उस कित…
3 months ago
Swaron Ka Samarpan | Shrikant Verma
Episode 1184
स्वरों का समर्पण । श्रीकांत वर्मा
डबडब अँधेरे में, समय की नदी में
अपने-अपने दिये सिरा दो;
शायद कोई दिया क्षितिज तक जा,
सूरज बन जाए!!
हरसिंगार जैसे यदि चुए…
3 months ago
Deewar | Saqi Farooqui
Episode 1183
दीवार । साक़ी फ़ारुक़ी
रगों में नाच रहा है इक आतिशीं ज़हराब
आतिशीं: अग्निमय ज़हराब: ज़हरीला पानी
तिरी तलाश फ़क़त जिस्म का तक़ाज़ा है
तिरी तलब के जहन्नम म…
3 months, 1 week ago