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Hoke Mayoos Na Yun Sham Se Dhalte Rahiye | Kunwar Bechain

Hoke Mayoos Na Yun Sham Se Dhalte Rahiye | Kunwar Bechain

Episode 1188 Published 4 weeks, 1 day ago
Description

हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए।  कुंवर बेचैन


हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए


ज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए

एक ही ठाँव पे ठहरेंगे तो थक जाएँगे


धीरे धीरे ही सही राह पे चलते रहिए

आप को ऊँचे जो उठना है तो आँसू की तरह


दिल से आँखों की तरफ़ हँस के उछलते रहिए

शाम को गिरता है तो सुब्ह सँभल जाता है


आप सूरज की तरह गिर के सँभलते रहिए

प्यार से अच्छा नहीं कोई भी साँचा ऐ 'कुँवर'


मोम बन के इसी साँचे में पिघलते रहिए

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