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Parantu | Kumar Ambuj

Parantu | Kumar Ambuj

Episode 1186 Published 1 month ago
Description

परंतु । कुमार अम्बुज


बुद्धिजीवी भी सड़क पर आ सकते हैं


परंतु क्या करें यह सरकार ठीक नहीं है

माना कि यह लोकतंत्र है


और हम सुधारना चाहते हैं यह समाज

परंतु इधर ठाकुरों के वोट बहुत हैं


बेचारा ज़िला दंडाधिकारी भी

करना तो चाहता है कुछ हस्तक्षेप


परंतु उसके अधिकारों में भी

निर्बल को ही दंडित कर सकना सीमित है


कहते हैं कि इस देश में कई लोग हैं दयालु

परंतु उनकी संपन्नता से


 ज़ाहिर  हो जाती है उनकी क्रूरता

यों तो मैं ख़ुश हूँ


परंतु मुझे शर्म आती है

अपनी समकालीन कायरता पर


मैं शब्दों से काम चलाता हूँ

परंतु मुझे अब कुछ दूसरे औज़ार  भी लगेंगे


परंतु संकल्प की कृशकाया

नामालूम खाई की तरफ़ लिए ही चली जाती है


विचार मेरे पास श्रेष्ठ है

परंतु पराजित होता हुआ


रोज़-रोज़ वह अल्पसंख्यक होता जाता है

सोचता हूँ उसे रखना होगा जीवित


परंतु हम सबको मिल कर ही

जो धीरे-धीरे अब बहुत अकेले हैं।


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