Podcast Episodes
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Seedhi | Padmaja Sharma
Episode 1139
सीढ़ी । पद्मजा शर्मा
जो किसी को
सीढ़ी बनाकर
ऊपर चढ़ रहे हैं
वह मुझसे कह रहे हैं
तुम कमज़ोर हो
कब से खड़ी हो
बीच रास्ते
हट जाओ
वे नहीं जानते
कि सीढ़ी के हटते ही…
2 months, 2 weeks ago
Lekar Seedha Naara | Shamsher Bahadur Singh
Episode 1138
लेकर सीधा नारा। शमशेर बहादुर सिंह
लेकर सीधा नारा
कौन पुकारा
अंतिम आशाओं की संध्याओं से?
पलकें डूबी ही-सी थीं -
पर अभी नहीं;
कोई सुनता-सा था मुझे
कहीं;
फिर क…
2 months, 2 weeks ago
Pasand Ki Jane Wali Stree | Savita Singh
Episode 1137
पसन्द की जाने वाली स्त्री । सविता सिंह
प्रेम करती हुई स्त्री ही अब भी पसन्द की जाती है
छल में भी एक अजीब जादू है
जो झूठ में नहीं
कितना मिलता-जुलता है झ…
2 months, 3 weeks ago
Kis Jane Kis Ki Pyas Bujhane Kidhar Gayin | Kaifi Azmi
Episode 1136
क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं । कैफ़ी आज़मी
क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं
इस सर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गईं
दीवाना पूछता है ये लहरों …
2 months, 3 weeks ago
Choolha | Tanwir Sheikh 'Ilham'
Episode 1135
चूल्हा । तनवीर शेख़ 'इल्हाम’
चूल्हे ने संभाला
पितृसत्ता को
और बनाएं रखा अपना वर्चस्व
ये चूल्हा
स्त्रियों के ऊपर
ऐसे स्थापित किया गया
जो पुरुषों के रौब को
आ…
2 months, 3 weeks ago
Wo Ladke Kaun They | Gautam Kumar
Episode 1134
वो लड़के कौन थे | गौतम कुमार
ख़ामोशी तोड़ो
क्यों देखते हो
अगली बारिश की राह
क्यों कर रहे हो
अपनी मिट्टी से उठने वाली सौंधी ख़ुशबू का इंतज़ार
अब कौन-सी फ़सल…
2 months, 3 weeks ago
Roop Naran Ke Tat Par | Rabindranath Tagore | Translation - Hans Kumar Tiwari
Episode 1133
रूप-नारान के तट पर । रवींद्रनाथ टैगोर
अनुवाद : हंसकुमार तिवारी
रूप-नारान के तट पर
जाग उठा मैं।
जाना, यह जगत्
सपना नहीं है।
लहू के अक्षरों में लिखा
अपना रूप…
2 months, 3 weeks ago
Dharti | Sharad Bilore
Episode 1132
धरती । शरद बिलौरे
दो बरस की नीलू
आसमान तकती है
पापा से कहती है
पापा मुझे आसमान चाहिए।
पापा ने कभी आसमान जैसी चीज़
अपने बाप से नहीं माँगी
एक बार तारे ज़रूर म…
2 months, 3 weeks ago
Ahimsa | Kanhaiyalal Sethia
Episode 1131
अहिंसा । कन्हैयालाल सेठिया
नहीं है
हिंसा का
नकारात्मक बोध
अहिंसा
एक मौलिक शोध
चिंत्य है जिसमें
दृष्टि से परे
दर्शन
जीवन से परे
आत्मा
जिसकी
मीमांसा
अनेकांत
भूमिक…
2 months, 3 weeks ago
Unghta Santri | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 1130
ऊँघता संतरी। विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
उसे मत जगाओ
वह सपने देख रहा है
बच्चे लौट रहे हैं उसके सपने में
पक्षी चहचहा रहे हैं उसके सपने में
बदल रहे हैं इंद्रधनु…
2 months, 4 weeks ago