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Tum Muskurana | Anurag Tiwari

Tum Muskurana | Anurag Tiwari

Episode 1157 Published 2 months ago
Description

तुम मुस्कुराना । अनुराग तिवारी


चाहे जैसी स्थितियां हो

हालात चाहे कैसे हो

दुख हो, निराशा हो

या फिर झूठी आशा हो

विफलता या असफलता हो

या फिर घोर विकलता हो

संताप, वेदना, दर्द हो

या थक कर हारा मर्द हो

जब अपनी शक्ति क्षीण लगे

हम-तुम सा वीर अधीर लगे

जब निश्छल प्रेम अधूरा हो

अपना सोचा ना पूरा हो

तब मानों इक बात मेरी, ना घबराना

तुम मुस्कुराना मुस्कुराना मुस्कुराना।।


सपने अगर अधूरे हो

कोशिश हो ना पूरे हों

राहों में कठिनाई हो

या खुद से तेरी लड़ाई हो

दिन में भी घोर अंधेरा हो

हर पल रातों ने घेरा हो

जब सूरज का ना आस रहे

खुद पर ना अब विश्वास रहे


जब दुनिया ने ठुकराया हो

मिल सबने तुम्हें गिराया हो

तब मानों इक बात मेरी, ना घबराना

तुम मुस्कुराना मुस्कुराना मुस्कुराना ।


मुश्किल में जीवन कटता हो

या हर कदमों पर खांइ हो

अपनों गैरों में उलझन हो

या लंका भेदी भाई हो

जब रोगों का ही साया हो

हर ईलाज गर ज़ाया हो

जब गीला तन भी सूखा हो

पेट भरा , मन भूखा हो

जब बातों में ना अर्थ रहे

मिलना, बतियाना व्यर्थ रहे

जब फूलों की उम्मीदों में

कांटों को तुमने पाया हो

तब मानों इक बात मेरी, ना घबराना

तुम मुस्कुराना मुस्कुराना मुस्कुराना ।।


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