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Tum Ho | Nazim Hikmat
Episode 1160
Published 1 month, 4 weeks ago
Description
तुम हो । नाज़िम हिकमत
अनुवाद : सुरेश सलिल
तुम्हीं मेरी ग़ुलामी हो, तुम्हीं मेरी आज़ादी
गर्मियों की किसी बेलिबास रात की तरह मेरा जिस्म
मेरा वतन हो तुम
पन्ने जैसी हल्की हरी आँखें,
हैरतअंगेज़ हो तुम, ख़ूबसूरत और ज़िंदादिल
मेरी हस्रत हो तुम, मेरी पहुँच से परे हरदम।