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Chandroday Humne Kabse Nahi Dekha | Gyanendrapati
Description
चन्द्रोदय हमने कब से नहीं देखा । ज्ञानेन्द्रपति
चन्द्रोदय!
हमने कब से नहीं देखा
प्रायः उस समय
टी.वी. के किसी-न-किसी चैनल पर
कोई-न-कोई नैनसुख कार्यक्रम चलता रहता है
कोई-न-कोई चन्द्रमुखी
उजागर कर रही होती है
हमारे जीवन का अँधेरा
और कभी जब
देर से घर लौटते
किसी क्षितिजवान सड़क के माथ पर औचक
दिखा कभी नवोदित चाँद, देखता
अनदेखी की हमने
आँख मिलाने से डरे
सड़क पकड़े चलते गए आदतन
कि आँखें मिलने पर पूछना होगा हाल-चाल
अफसोस के दो शब्द कहने होंगे
हो जाएगी अवेर
जबकि जल्दी है आज
जबकि
शुक्ल पक्ष का था वह चाँद
हर दिन अपनी एक कला बढ़ाता
उदार हँसमुख
कृष्ण पक्ष का क्रमशः कृश भी होता वह
अँजोर-भरी होती उसकी अँजुरी
हृदय में न टिकने देती अंधियारा
चन्द्रोदय!
हमने कब से नहीं देखा
चन्द्रोदय! जिसे निहारती है नदी
अपने सूर्य-क्लान्त सीने में उतारती है।