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Parichay | Anjana Tandon
Episode 512
परिचय | अंजना टंडन
अब तक
हर देह के ताने बाने पर
स्थित है
जुलाहे की ऊँगलियों के निशान
बस थोड़ा सा अंदर
रूह तक
जा धँसे हैं,
विश्वास ना हो
तो कभी
किसी की
रूह की द…
1 year, 11 months ago
Surya | Naresh Saxena
Episode 511
सूर्य | नरेश सक्सेना
ऊर्जा से भरे लेकिन
अक्ल से लाचार, अपने भुवनभास्कर
इंच भर भी हिल नहीं पाते
कि सुलगा दें किसी का सर्द चुल्हा
ठेल उढ़का हुआ दरवाजा
चाय भर…
1 year, 11 months ago
Ladki | Pratibha Saxena
Episode 510
लड़की | प्रतिभा सक्सेना
आती है एक लड़की,
मगन-मुस्कराती,
खिलखिलाकर हँसती है,
सब चौंक उठते हैं -
क्यों हँसी लड़की ?
उसे क्या पता आगे का हाल,
प्रसन्न भावनाओं …
1 year, 11 months ago
Jarkhareed Deh | Rupam Mishra
Episode 509
जरखरीद देह - रूपम मिश्र
हम एक ही पटकथा के पात्र थे
एक ही कहानी कहते हुए हम दोनों अलग-अलग दृश्य में होते
जैसे एक दृश्य तुम देखते हुए कहते तुमसे कभी मिल…
1 year, 11 months ago
Khalipan | Vinay Kumar Singh
Episode 507
ख़ालीपन | विनय कुमार सिंह
माँ अंदर से उदास है
सब कुछ वैसा ही नहीं है
जो बाहर से दिख रहा है
वैसे तो घर भरा हुआ है
सब हंस रहे हैं
खाने की खुशबू आ रही है
शाम…
1 year, 11 months ago
Hum Na Rahenge | Kedarnath Agarwal
Episode 506
हम न रहेंगे | केदारनाथ अग्रवाल
हम न रहेंगे-
तब भी तो यह खेत रहेंगे;
इन खेतों पर घन घहराते
शेष रहेंगे;
जीवन देते,
प्यास बुझाते,
माटी को मद-मस्त बनाते,
श्याम …
1 year, 11 months ago
Tan Gayi Reedh | Nagarjun
Episode 505
तन गई रीढ़ | नागार्जुन
झुकी पीठ को मिला
किसी हथेली का स्पर्श
तन गई रीढ़
महसूस हुई कन्धों को
पीछे से,
किसी नाक की सहज उष्ण निराकुल साँसें
तन गई रीढ़
कौंधी कही…
1 year, 11 months ago
Mrityu | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 504
मृत्यु - विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
मेरे जन्म के साथ ही हुआ था
उसका भी जन्म...
मेरी ही काया में पुष्ट होते रहे
उसके भी अंग
में जीवन-भर सँवारता रहा जिन्हें
औ…
1 year, 11 months ago
Ichhaon Ka Ghar | Anjana Bhatt
Episode 503
इच्छाओं का घर | अंजना भट्ट
इच्छाओं का घर- कहाँ है?
क्या है मेरा मन या मस्तिष्क या फिर मेरी सुप्त चेतना?
इच्छाएं हैं भरपूर, जोरदार और कुछ मजबूर
पर किसने …
1 year, 11 months ago
Swadesh Ke Prati | Subhadra Kumari Chauhan
Episode 508
स्वदेश के प्रति / सुभद्राकुमारी चौहान
आ, स्वतंत्र प्यारे स्वदेश आ,
स्वागत करती हूँ तेरा।
तुझे देखकर आज हो रहा,
दूना प्रमुदित मन मेरा॥
आ, उस बालक के समान
जो…
1 year, 11 months ago