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Ladki Ne Darna Chhor Diya | Sheoraj Singh 'Bechain'
Episode 589
लड़की ने डरना छोड़ दिया | डॉ श्यौराज सिंह बेचैन
लड़की ने डरना छोड़ दिया
अक्षर के जादू ने
उस पर असर बड़ा बेजोड़ किया,
चुप्पा रहना छोड़
दिया, लड़की ने डरना…
1 year, 11 months ago
Doosre Log | Manglesh Dabral
Episode 588
दूसरे लोग | मंगलेश डबराल
दूसरे लोग भी पेड़ों और बादलों से प्यार करते हैं
वे भी चाहते हैं कि रात में फूल न तोड़े जाएँ
उन्हें भी नहाना पसन्द है एक नदी उन…
1 year, 11 months ago
Vah Chehra | Kuldeep Kumar
Episode 587
वह चेहरा | कुलदीप कुमार
आज फिर दिखीं वे आँखें
किसी और माथे के नीचे
वैसी ही गहरी काली उदास
फिर कहीं दिखे वे सांवले होंठ
अपनी ख़ामोशी में अकेले
किन्हीं और आँ…
1 year, 11 months ago
Tumhari Kavita | Prashant Purohit
Episode 586
तुम्हारी कविता | प्रशांत पुरोहित
तुम्हारी कविता में उसकी काली आँखें थीं-
कालिमा किसकी-
पुतली की,
भँवों की,
कोर की,
या काजल-घुले आँसुओं की झिलमिलाती झील की…
1 year, 11 months ago
Nadiyan | Alok Dhanwa
Episode 585
नदियाँ | आलोक धन्वा
इछामती और मेघना
महानंदा
रावी और झेलम
गंगा गोदावरी
नर्मदा और घाघरा
नाम लेते हुए भी तकलीफ़ होती है
उनसे उतनी ही मुलाक़ात होती है
जितनी वे र…
1 year, 11 months ago
Pani Ek Roshni Hai | Kedarnath Singh
Episode 584
पानी एक रोशनी है। केदारनाथ सिंह
इन्तज़ार मत करो
जो कहना हो कह डालो
क्योंकि हो सकता है फिर कहने का
कोई अर्थ न रह जाए
सोचो
जहाँ खड़े हो, वहीं से सोचो
चाहे राख…
1 year, 11 months ago
Ma | Uttima Keshari
Episode 583
माँ | उत्तिमा केशरी
माँ आसनी पर बैठकर जब
एकाकी होकर
बाँचती है रामायण
तब उनके स्निग्ध
ज्योतिर्मय नयन
भीग उठते हैं बार-बार ।
माँ जब ज्योत्सना भरी रात्रि में
सु…
1 year, 11 months ago
Andhere Ki Bhi Hoti Hai Ek Vyavastha | Anupam Singh
Episode 582
अँधेरे की भी होती है एक व्यवस्था | अनुपम सिंह
अँधेरे की भी होती है एक व्यवस्था
चीज़ें गतिमान रहती हैं अपनी जगहों पर
बादल गरजते हैं कहीं टूट पड़ती हैं ब…
1 year, 11 months ago
Achha Tha Agar Zakhm Na Bharte Koi Din Aur | Faraz
Episode 581
अच्छा था अगर ज़ख्म न भरते कोई दिन और | फ़राज़
अच्छा था अगर ज़ख्म न भरते कोई दिन और
उस कू-ए-मलामत में गुज़रते कोई दिन और
रातों के तेरी यादों के खुर्शीद उ…
1 year, 11 months ago
Vah Jan Mare Nahi Marega | Kedarnath Agarwal
Episode 580
वह जन मारे नहीं मरेगा | केदारनाथ अग्रवाल
जो जीवन की धूल चाटकर बड़ा हुआ है,
तूफानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है,
जिसने सोने को खोदा, लोहा मोड़ा है,
जो रवि…
1 year, 11 months ago