Podcast Episodes
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Us Roz Bhi | Achal Vajpeyi
Episode 521
उस रोज़ भी | अचल वाजपेयी
उस रोज़ भी रोज़ की तरह
लोग वह मिट्टी खोदते रहे
जो प्रकृति से वंध्या थी
उस आकाश की गरिमा पर
प्रार्थनाएँ गाते रहे
जो जन्मजात बहरा …
1 year, 11 months ago
Ye Kiska Ghar Hai | Ramdarash Mishra
Episode 520
यह किसका घर है? | रामदरश मिश्रा
"यह किसका घर है?"
"हिन्दू का।"
"यह किसका घर है?"
"मुसलमान का।"
यह किसका घर है?"
"ईसाई का।”
शाम होने को आयी
सवेरे से ही भटक र…
1 year, 11 months ago
Ek Aashirwad | Dushyant Kumar
Episode 519
एक आशीर्वाद | दुष्यंत कुमार
जा तेरे स्वप्न बड़े हों।
भावना की गोद से उतर कर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें।
चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये
रूठना मचलना…
1 year, 11 months ago
Baarish Mein Joote Ke Bina Nikalta Hun Ghar Se | Shahanshah Alam
Episode 518
बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से | शहंशाह आलम
बारिश में जूते के बिना निकलता हूँ घर से
बचपन में हम सब कितनी दफ़ा निकल जाते थे
घर से नंगे पाँव बार…
1 year, 11 months ago
Kumhaar Akela Shaks Hota Hai | Shahanshah Alam
Episode 517
कुम्हार अकेला शख़्स होता है | शहंशाह आलम
जब तक एक भी कुम्हार है
जीवन से भरे इस भूतल पर
और मिट्टी आकार ले रही है
समझो कि मंगलकामनाएं की जा रही हैं
नदियों…
1 year, 11 months ago
Sagar Se Milkar Jaise | Bhavani Prasad Mishra
Episode 516
सागर से मिलकर जैसे / भवानीप्रसाद मिश्र
सागर से मिलकर जैसे
नदी खारी हो जाती है
तबीयत वैसे ही
भारी हो जाती है मेरी
सम्पन्नों से मिलकर
व्यक्ति से मिलने का
अनुभ…
1 year, 11 months ago
Ek Baar Jo | Ashok Vajpeyi
Episode 502
एक बार जो | अशोक वाजपेयी
एक बार जो ढल जाएँगे
शायद ही फिर खिल पाएँगे।
फूल शब्द या प्रेम
पंख स्वप्न या याद
जीवन से जब छूट गए तो
फिर न वापस आएँगे।
अभी बचाने य…
1 year, 11 months ago
Aangan | Ramdarash Mishra
Episode 515
आँगन | रामदरश मिश्रा
तने हुए दो पड़ोसी दरवाज़े
एक-दूसरे की आँखों में आँखें धँसाकर
गुर्राते रहे कुत्तों की तरह
फेंकते रहे आग और धुआँ भरे शब्दों का कोलाह…
1 year, 11 months ago
Shabd Jo Parinde Hain | Nasira Sharma
Episode 514
शब्द जो परिंदे हैं | नासिरा शर्मा
शब्द जो परिंदे हैं।
उड़ते हैं खुले आसमान और खुले ज़हनों में
जिनकी आमद से हो जाती है, दिल की कंदीलें रौशन।
अक्षरों को …
1 year, 11 months ago
Bache Hue Shabd | Madan Kashyap
Episode 513
बचे हुए शब्द | मदन कश्यप
जितने शब्द आ पाते हैं कविता में उससे कहीं ज़्यादा छूट जाते हैं।
बचे हुए शब्द छपछप करते रहते हैं
मेरी आत्मा के निकट बह रहे पनसो…
1 year, 11 months ago