Podcast Episodes
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Khushi Kaisa Durbhagya | Manglesh Dabral
Episode 531
खुशी कैसा दुर्भाग्य | मगलेश डबराल
जिसने कुछ रचा नहीं समाज में
उसी का हो चला समाज
वही है नियन्ता जो कहता है तोडँगा अभी और भी कुछ
जो है खूँखार हँसी है उसक…
1 year, 10 months ago
Chupchap Ullas | Bhawani Prasad Mishra
Episode 530
चुपचाप उल्लास | भवानीप्रसाद मिश्र
हम रात देर तक
बात करते रहे
जैसे दोस्त
बहुत दिनों के बाद
मिलने पर करते हैं
और झरते हैं
जैसे उनके आस पास
उनके पुराने
गाँव के स…
1 year, 10 months ago
Seene Me Kya Hai Tumhare | Akshay Upadhyay
Episode 529
सीने में क्या है तुम्हारे / अक्षय उपाध्याय
कितने सूरज हैं तुम्हारे सीने में
कितनी नदियाँ हैं
कितने झरने हैं
कितने पहाड़ हैं तुम्हारी देह में
कितनी गुफ़ाएँ…
1 year, 10 months ago
Bhookh | Achyutanand Mishra
Episode 528
भूख / अच्युतानंद मिश्र
मेरी माँ अभी मरी नहीं
उसकी सूखी झुलसी हुई छाती
और अपनी फटी हुई जेब
अक्सर मेरे
सपनों में आती हैं
मेरी नींद उचट जाती है
मैं सोचने लगता …
1 year, 10 months ago
Khejadi Se Ugi Ho | Nandkishore Acharya
Episode 527
खेजड़ी-सी उगी हो | नंदकिशोर आचार्य
खेजड़ी-सी उगी हो मुझ में
हरियल खेजड़ी सी तुम
सूने, रेतीले विस्तार में :
तुम्हीं में से फूट आया हूँ
ताज़ी, घनी पत्तियों…
1 year, 10 months ago
Raat Yun Kehne Laga Mujhse Gagan Ka Chand | Ramdhari Singh 'Dinkar'
Episode 526
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद / रामधारी सिंह "दिनकर"
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है!
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँ…
1 year, 10 months ago
Pita Ke Ghar Me | Rupam Mishra
Episode 525
पिता के घर में | रूपम मिश्रा
पिता क्या मैं तुम्हें याद हूँ!
मुझे तो तुम याद रहते हो
क्योंकि ये हमेशा मुझे याद कराया गया
फासीवाद मुझे कभी किताब से नहीं सम…
1 year, 10 months ago
Paas | Ashok Vajpeyi
Episode 524
पास | अशोक वाजपेयी
पत्थर के पास था वृक्ष
वृक्ष के पास थी झाड़ी
झाड़ी के पास थी घास
घास के पास थी धरती
धरती के पास थी ऊँची चट्टान
चट्टान के पास था क़िले का…
1 year, 10 months ago
Padhakku Ka Soojh | Ramdhari Singh 'Dinkar'
Episode 523
पढ़क्कू की सूझ | रामधारी सिंह "दिनकर"
एक पढ़क्कू बड़े तेज थे, तर्कशास्त्र पढ़ते थे,
जहाँ न कोई बात, वहाँ भी नए बात गढ़ते थे।
एक रोज़ वे पड़े फिक्र में …
1 year, 10 months ago
Dhahai | Prashant Purohit
Episode 522
ढहाई | प्रशांत पुरोहित
उसने पहले मेरे घर के
दरवाज़े को तोड़ा,
छज्जे को पटका फिर,
बालकनी को टहोका,
अब दीवारों का नम्बर आया,
तो उन्हें भी गिराया,
मेरे छोटे …
1 year, 11 months ago