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Aangan Gayab Ho Gaya | Kailash Gautam
Episode 684
आँगन गायब हो गया | कैलाश गौतम
घर फूटे गलियारे निकले आँगन गायब हो गया
शासन और प्रशासन में अनुशासन ग़ायब हो गया ।
त्यौहारों का गला दबाया
बदसूरत महँगाई ने
आँ…
1 year, 5 months ago
Nahin Nigaah Mein | Faiz Ahmed Faiz
Episode 683
नहीं निगाह में | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही
न तन में ख़ून फ़राहम न अश्क आँखों में
नमाज़-…
1 year, 5 months ago
Talash Mein Wahan | Nandkishore Acharya
Episode 682
तलाश में वहाँ | नंदकिशोर आचार्य
जाते हैं तलाश में
वहाँ
जड़ों की जो अक्सर
खुद जड़ हो जाते हैं
इतिहास मक़बरा है
पूजा जा सकता है जिसको
जिसमें पर जिया नहीं जात…
1 year, 5 months ago
Gaman | Aagney
Episode 681
गमन | आग्नेय
फूल के बोझ से
टूटती नहीं है टहनी
फूल ही अलग कर दिया जाता है
टहनी से
उसी तरह टूटता है संसार
टूटता जाता है संसार--
मेरा और तुम्हारा
चमत्कार है या …
1 year, 5 months ago
Hatyare Kuch Nahi Bigaad Sakte | Chandrakant Devtale
Episode 680
हत्यारे कुछ नहीं बिगाड़ सकते/ चंद्रकांत देवताले
नाम मेरे लिए
पेड़ से एक टूटा पत्ता
हवा उसकी परवाह करे
मेरे भीतर गड़ी दूसरी ही चीज़ें
पृथ्वी की गंध और
पुरखो…
1 year, 5 months ago
Labour Chowk | Shivam Chaubey
Episode 679
लेबर चौक | शिवम चौबे
कठरे में सूरज ढोकर लाते हुए
गमछे में कन्नी, खुरपी, छेनी, हथौड़ी बाँधे हुए
रूखे-कटे हाथों से समय को धरकेलते हुए
पुलिस चौकी और लाल चौ…
1 year, 5 months ago
Kathariyan | Ekta Verma
Episode 678
कथरियाँ | एकता वर्मा
कथरियाँ
गृहस्थियों के उत्सव-गीत होती हैं।
जेठ-वैसाख के सूखे हल्के दिनों में
सालों से संजोये गए चीथड़ों को क़रीने से सजाकर
औरतें बुनत…
1 year, 6 months ago
Rishta | Anamika
Episode 677
रिश्ता | अनामिका
वह बिल्कुल अनजान थी!
मेरा उससे रिश्ता बस इतना था
कि हम एक पंसारी के गाहक थे
नए मुहल्ले में!
वह मेरे पहले से बैठी थी-
टॉफी के मर्तबान से टि…
1 year, 6 months ago
Kaise Bachaunga Apna Prem | Alok Azad
Episode 676
कैसे बचाऊँगा अपना प्रेम | आलोक आज़ाद
स्टील का दरवाजा
गोलियों से छलनी हआ कराहता है
और ठीक सामने,
तुम चांदनी में नहाए, आँखों में आंसू लिए देखती हो
हर रात ए…
1 year, 6 months ago
Kankreela Maidan | Kedarnath Aggarwal
Episode 675
कंकरीला मैदान | केदारनाथ अग्रवाल
कंकरीला मैदान
ज्ञान की तरह जठर-जड़ लंबा-चौड़ा,
गत वैभव की विकल याद में-
बड़ी दूर तक चला गया है गुमसुम खोया!
जहाँ-तहाँ कु…
1 year, 6 months ago