Podcast Episodes
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Dharti Ki Behnein | Anupam Singh
Episode 694
धरती की बहनें | अनुपम सिंह
मैं बालों में फूल खोंस
धरती की बहन बनी फिरती हूँ
मैंने एक गेंद अपने छोटे भाई
आसमान की तरफ़ उछाल दी है।
हम तीनों की माँ नदी है
बा…
1 year, 5 months ago
Pehli Pension | Anamika
Episode 693
पहली पेंशन /अनामिका
श्रीमती कार्लेकर
अपनी पहली पेंशन लेकर
जब घर लौटीं–
सारी निलम्बित इच्छाएँ
अपना दावा पेश करने लगीं।
जहाँ जो भी टोकरी उठाई
उसके नीचे छोटी च…
1 year, 5 months ago
Is Tarah Rehna Chahunga | Shahanshah Alam
Episode 692
इस तरह रहना चाहूँगा | शहंशाह आलम
इस तरह रहना चाहूँगा भाषा में
जिस तरह शहद मुँह में रहता है
रहूँगा किताब में मोरपंख की तरह
रहूँगा पेड़ में पानी में धूप म…
1 year, 5 months ago
Ye Log | Naresh Saxena
Episode 691
ये लोग | नरेश सक्सेना
तूफान आया था
कुछ पेड़ों के पत्ते टूट गए हैं
कुछ की डालें
और कुछ तो जड़ से ही उखड़ गए हैं
इनमें से सिर्फ़
कुछ ही भाग्यशाली ऐसे बचे
जिन…
1 year, 5 months ago
Kya Bhoolun Kya Yaad Karun Main | Harivansh Rai Bachchan
Episode 690
क्या भूलूं क्या याद करूं मैं | हरिवंश राय बच्चन
अगणित उन्मादों के क्षण हैं,
अगणित अवसादों के क्षण हैं,
रजनी की सूनी की घड़ियों को किन-किन से आबाद करूं म…
1 year, 5 months ago
Manch Se | Vaibhav Sharma
Episode 689
मंच से | वैभव शर्मा
मंच के एक कोने से शोर उठता है और रोशनी भी
सामने बैठी जनता डर से भर जाती है।
मंच से बताया जाता है शांती के पहले जरूरी है क्रांति
तो सा…
1 year, 5 months ago
Bacchu Babu | Kailash Gautam
Episode 688
बच्चू बाबू | कैलाश गौतम
बच्चू बाबू एम.ए. करके सात साल झख मारे
खेत बेंचकर पढ़े पढ़ाई, उल्लू बने बिचारे
कितनी अर्ज़ी दिए न जाने, कितना फूँके तापे
कितनी ध…
1 year, 5 months ago
Maut Ke Farishtey | Abdul Bismillah
Episode 687
मौत के फ़रिश्ते | अब्दुल बिस्मिल्लाह
अपने एक हाथ में अंगारा
और दूसरे हाथ में ज़हर का गिलास लेकर
जिस रोज़ मैंने
अपनी ज़िंदगी के साथ
पहली बार मज़ाक़ किया था…
1 year, 5 months ago
Torch | Manglesh Dabral
Episode 686
टॉर्च | मंगलेश डबराल
मेरे बचपन के दिनों में
एक बार मेरे पिता एक सुन्दर-सी टॉर्च लाए
जिसके शीशे में खाँचे बने हुए थे
जैसे आजकल कारों की हेडलाइट में होते …
1 year, 5 months ago
Suitcase : New York Se Ghar Tak | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 685
सूटकेस : न्यूयर्क से घर तक | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
"इस अनजान देश में
अकेले छोड़ रहे मुझे"
मेरे सूटकेस ने बेबस निगाहों से देखा
जैसे परकटा पक्षी
देखता हो …
1 year, 5 months ago