Podcast Episodes
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Silbatta | Prashant Bebaar
Episode 704
सिलबट्टा | प्रशांत बेबार
वो पीसती है दिन रात लगातार
मसाले सिलबट्टे पर
तेज़ तीखे मसाले
अक्सर जलने वाले
पीसकर दाँती
तानकर भौहें
वो पीसती है हरी-हरी नरम पत्ति…
1 year, 5 months ago
Adiyal Saans | Kedarnath Singh
Episode 703
अड़ियल साँस | केदारनाथ सिंह
पृथ्वी बुख़ार में जल रही थी
और इस महान पृथ्वी के
एक छोटे-से सिरे पर
एक छोटी-सी कोठरी में
लेटी थी वह
और उसकी साँस
अब भी चल रही थी…
1 year, 5 months ago
Ae Aurat | Nasira Sharma
Episode 702
ऐ औरत! | नासिरा शर्मा
जाड़े की इस बदली भरी शाम को
कहाँ जा रही हो पीठ दिखाते हुए
ठहरो तो ज़रा!
मुखड़ा तो देखूँ कि उस पर कितनी सिलवटें हैं
थकन और भूख-प्या…
1 year, 5 months ago
Haar | Prabhat
Episode 701
हार | प्रभात
जब-जब भी मैं हारता हूँ
मुझे स्त्रियों की याद आती है
और ताक़त मिलती है
वे सदा हारी हुई परिस्थिति में ही
काम करती हैं
उनमें एक धुन एक लय
एक मुक्त…
1 year, 5 months ago
Gussa | Gulzar
Episode 700
ग़ुस्सा | गुलज़ार
बूँद बराबर बौना-सा भन्नाकर लपका
पैर के अँगूठे से उछला
टख़नों से घुटनों पर आया
पेट पे कूदा
नाक पकड़ कर
फन फैला कर सर पे चढ़ गया ग़ुस्सा!
1 year, 5 months ago
Mareez Ka Naam | Usman Khan
Episode 699
मरीज़ का नाम- उस्मान ख़ान
चाहता हूँ
किसी शाम तुम्हें गले लगाकर ख़ूब रोना
लेकिन मेरे सपनों में भी वो दिन नहीं ढलता
जिसके आख़री सिरे पर तुमसे गले मिलने की …
1 year, 5 months ago
Banaya Hai Maine Ye Ghar | Ramdarash Mishra
Episode 698
बनाया है मैंने ये घर | रामदरश मिश्र
बनाया है मैंने ये घर धीरे-धीरे
खुले मेरे ख़्वाबों के पर धीरे-धीरे
किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला
कटा ज़िन्दगी का सफर …
1 year, 5 months ago
Apne Aap Se | Zaahid Dar
Episode 697
अपने आप से | ज़ाहिद डार
मैं ने लोगों से भला क्या सीखा
यही अल्फ़ाज़ में झूटी सच्ची
बात से बात मिलाना दिल की
बे-यक़ीनी को छुपाना सर को
हर ग़बी कुंद-ज़ेहन शख…
1 year, 5 months ago
Mera Ghar, Uska Ghar | Aagney
Episode 696
मेरा घर, उसका घर / आग्नेय
एक चिड़िया
प्रतिदिन मेरे घर आती है
जानता नहीं हूँ उसका नाम
सिर्फ़ पहचानता हूँ उसको
वह चहचहाती है देर तक
ढूँढती है दाने :
और फिर उड…
1 year, 5 months ago
Rachna Ki Adhi Raat | Kedarnath Singh
Episode 695
रचना की आधी रात | केदारनाथ सिंह
अन्धकार! अन्धकार! अन्धकार
आती है
कानों में
फिर भी कुछ आवाज़ें
दूर बहुत दूर
कहीं
आहत सन्नाटे में
रह- रहकर
ईटों पर
ईटों के रखने क…
1 year, 5 months ago