Podcast Episodes
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Capitalism | Gaurav Tiwari
Episode 714
कैपिटलिज़्म | गौरव तिवारी
बाग में अक्सर नहीं तोड़े जाते गुलाब
लोग या तो पसंद करते हैं उसकी ख़ुशबू
या फिर डरते हैं उसमें लगे काँटों से
जो तोड़ने पर कर सक…
1 year, 4 months ago
Hajamat | Anup Sethi
Episode 713
हजामत | अनूप सेठी
सैलून की कुर्सी पर बैठे हुए
कान के पीछे उस्तरा चला तो सिहरन हुई
आइने में देखा बाबा ने
साठ-पैंसठ साल पहले भी
कान के पीछे गुदगुदी हुई थी…
1 year, 4 months ago
Ek Chota Sa Anurodh | Kedarnath Singh
Episode 712
एक छोटा सा अनुरोध | केदारनाथ सिंह
आज की शाम
जो बाज़ार जा रहे हैं
उनसे मेरा अनुरोध है
एक छोटा-सा अनुरोध
क्यों न ऐसा हो कि आज शाम
हम अपने थैले और डोलचियाँ
रख …
1 year, 4 months ago
Jal | Ashok Vajpeyi
Episode 711
जल | अशोक वाजपेयी
जल
खोजता है
जल में
हरियाली का उद्गम
कुछ नीली स्मृतियाँ
और मटमैले चिद्म
जल
भागता है
जल की गली में
गाते हुए
लय का
विलय का उच्छल गान
जल देता है
जल…
1 year, 4 months ago
Aman Ka Naya Silsila Chahta Hun | Lakshmi Shankar Vajpeyi
Episode 710
अमन का नया सिलसिला चाहता हूँ | लक्ष्मीशंकर वाजपेयी
अमन का नया सिलसिला चाहता हूँ
जो सबका हो ऐसा ख़ुदा चाहता हूँ।
जो बीमार माहौल को ताज़गी दे
वतन के लिए वो…
1 year, 4 months ago
Sapne | Shivam Chaubey
Episode 709
सपने | शिवम चौबे
रिक्शे वाले सवारियों के सपने देखते हैं
सवारियाँ गंतव्य के
दुकानदार के सपने में ग्राहक ही आएं ये ज़रूरी नहीं
मॉल भी आ सकते हैं
छोटे व्याप…
1 year, 4 months ago
Main Unka Hi Hota | Muktibodh
Episode 708
मैं उनका ही होता| गजानन माधव मुक्तिबोध
मैं उनका ही होता, जिनसे
मैंने रूप-भाव पाए हैं।
वे मेरे ही लिए बँधे हैं
जो मर्यादाएँ लाए हैं।
मेरे शब्द, भाव उनके ह…
1 year, 4 months ago
Prem Gatha | Ajay Kumar
Episode 707
प्रेम गाथा | अजय कुमार
प्रेम
एक कमरे को
कैनवास में तब्दील कर के
उसमें आँक सकता है
एक बादल
जंगल में नाचता हुआ मोर
एक गिरती हुई बारिश
देवदार का एक पेड़
एक सितार…
1 year, 4 months ago
Chanderi | Kumar Ambuj
Episode 706
चँदेरी | कुमार अम्बुज
चंदेरी मेरे शहर से बहुत दूर नहीं है
मुझे दूर जाकर पता चलता है
बहुत माँग है चंदेरी की साड़ियों की
चँदेरी मेरे शहर से इतनी क़रीब ह…
1 year, 5 months ago
Wo To Khusbu Hai Hawaon Mein Bikhar Jayega | Parveen Shakir
Episode 705
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा | परवीन शाकिर
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भ…
1 year, 5 months ago