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Prem Gatha | Ajay Kumar
Episode 707
Published 1 year, 4 months ago
Description
प्रेम गाथा | अजय कुमार
प्रेम
एक कमरे को
कैनवास में तब्दील कर के
उसमें आँक सकता है
एक बादल
जंगल में नाचता हुआ मोर
एक गिरती हुई बारिश
देवदार का एक पेड़
एक सितारों भरी रेशमी रात
एक अलसाई गुनगुनाती सुबह
समुंदर की लहरों को
मदमदाता शोर
प्रेम एक गलती को
दे सकता है पद्म विभूषण
एक झूठ को
सहेज कर रख सकता है आजीवन
एक पराजय का
सहला सकता है माथा
और हर प्रतीक्षा का
कर सकता है आलिंगन
पर प्रेम की नदी में
अपमानों से बन सकतें है भंवर
उपेक्षाओं से पड़ सकती हैं
अदृश्य गांठें
तिरस्कारों से बेसुरा हो सकता है
उसके भीतर बजता
राग यमन कल्याण
कोई भी प्रेम
बस अपनी अवेहलना नहीं भूलता
सिर्फ़ भूलने का
एक अभिनय कर सकता है
जिसका कभी भी हो सकता है
आकस्मिक पटाक्षेप
आप यह याद रखिए