Podcast Episodes
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Pret Lok Mein | Maksim Tank | Translation - Ramesh Kaushik
Episode 878
प्रेत लोक में/ मक्सिम तान्क
अनुवाद: रमेश कौशिक
एक बार मैं
प्रेत-लोक में गया
दांते के संग
उसके अँधियारे घेरों में
घूम रहे थे हम
तभी कवि रुक गया
अचम्भे में आ
वि…
1 year, 1 month ago
Bura Kshan | Rafael Alberti | Jeetendra Kumar
Episode 877
बुरा क्षण/ रफ़ाइल अलबर्ती
अनुवाद : जितेंद्र कुमार
उन दिनों जब मैं सोचा करता था
कि गेहूँ के खेतों में देवताओं और सितारों का निवास है
और कुहरा हिरनी की आँख…
1 year, 1 month ago
Bairang Benaam Chithiyaan | Ramdarash Mishra
Episode 876
बैरंग बेनाम चिट्ठियाँ | रामदरश मिश्र
कब से
यह बैरंग बेनाम चिट्ठी लिये हुए
यह डाकिया दर-दर घूम रहा है
कोई नहीं है वारिस इस चिट्ठी का
कौन जाने
किसका अनकहा द…
1 year, 1 month ago
Jeevan | Malay
Episode 875
जीवन/ मलय
अथाह गहराइयों की
आँख से
देखता हूँ ब्रह्मांड
सतह पर
तैरता यह जीवन
छोटे से छोटा है
1 year, 1 month ago
Ichha | Shubha
Episode 874
इच्छा | शुभा
मैं चाहती हूँ कुछ अव्यवहारिक लोग
एक गोष्ठी करें
कि समस्याओं को कैसे बचाया जाए
उन्हें जन्म लेने दिया जाए
वे अपना पूरा क़द पाएँ
वे खड़ी हों
और दि…
1 year, 1 month ago
Ishq Mein Referee Nahi Hota | Gulzar
Episode 873
इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता! | गुलज़ार
इश्क़ में ‘रेफ़री’ नहीं होता
‘फ़ाउल’ होते हैं बेशुमार मगर
‘पेनल्टी कॉर्नर’ नहीं मिलता!
दोनों टीमें जुनूँ में दौड़…
1 year, 1 month ago
Unka Ghar | Hemant Deolekar
Episode 872
उनका घर | हेमंत देवलेकर
आग बरसाती दोपहर में
तगारियाँ भर- भर कर
माल चढ़ा रहे हैं जो ऊपर
घर मेरा बना रहे हैं।
जिस छत को भरते हैं
अपने हाड़ और पसीने से
वे इ…
1 year, 1 month ago
Prateeksha Mein Prem | Chitra Pawar
Episode 871
प्रतीक्षा में प्रेम | चित्रा पंवार
नीलगिरि की पहाड़ी
बारह बरस बाद
नीलकुरिंजी के खिलने पर ही
करती है
अपनी देह का शृंगार
वह नहीं जाती चंपा, चमेली, गुलाब के प…
1 year, 1 month ago
Chipche Doodh Se Nahlate Hain | Gulzar
Episode 870
चिपचे दूध से नहलाते हैं आँगन में खड़ा कर के तुम्हें | गुलज़ार
चिपचे दूध से नहलाते हैं आँगन में खड़ा कर के तुम्हें
शहद भी, तेल भी, हल्दी भी, न जाने क्या…
1 year, 1 month ago
Raat Kisi Ka Ghar Nahi | Rajesh Joshi
Episode 869
रात किसी का घर नहीं | राजेश जोशी
रात गए सड़कों पर अक्सर एक न एक आदमी ऐसा ज़रूर मिल जाता है
जो अपने घर का रास्ता भूल गया होता है
कभी-कभी कोई ऐसा भी होता …
1 year, 1 month ago