Podcast Episodes
Back to Search
Raahein | Narendra Sharma
Episode 813
राहें | नरेंद्र शर्मा
कुहरा छाया है गिरि-वन पर,
गिरि-शिखरों पर;
नहीं रहा आकाश आज आकाश,
घिरे हैं बादल धौरे;
मैं नीचे समतल पठार पर
चला जा रहा—
लेकिन ऊँचे तल क…
1 year, 1 month ago
Din Baune Ho Gaye | Umakant Malviya
Episode 812
दिन बौने हो गए | उमाकांत मालवीय
रातें लम्बी हुईं
दिन बौने हो गए ।
ठिगने कद वाले दिन
लम्बी परछाइयाँ
धूप की इकाई पर
तिमिर की दहाइयाँ
रातें पत्तल हुईं
दिन दौने …
1 year, 1 month ago
Kuch Ishq Kia Kuch Kaam Kia | Faiz Ahmed Faiz
Episode 811
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया/ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिक़ी करते थे
हम…
1 year, 1 month ago
Purani Haveli | Khagendra Thakur
Episode 810
पुरानी हवेली | खगेंद्र ठाकुर
इस हवेली से
गाँव में आदी-गुड़ बंटे
सोहर की धुन सुने
बहुत दिन हो गए
इस हवेली से
सत्यनारायण का प्रसाद बंटे
घड़ी-घंट की आवाज सुने…
1 year, 1 month ago
Deewana Dil | Nasira Sharma
Episode 809
दीवाना दिल - नासिरा शर्मा
अक्सर सोचती हूँ मैं
जब भी मैंने चलना चाहा तुम्हें लेकर अपने संग
नहीं समझ पाए तुम वह राहें
तुम्हारे खेतों से उगी गेंहूँ की बालि…
1 year, 1 month ago
Sambandhon Ke Thande Ghar Mein | Amarnath Srivastava
Episode 808
सम्बन्धों के ठंडे घर में | अमरनाथ श्रीवास्तव
सम्बन्धों के ठंडे घर में
वैसे तो सबकुछ है लेकिन
इतने नीचे तापमान पर
रक्तचाप बेहद खलता है|
दिनचर्या कोरी दिनचर…
1 year, 1 month ago
Mrityu Geet | Langston Hughes | Dharmvir Bharti
Episode 807
मृत्यु-गीत | लैंग्स्टन ह्यूज़
अनुवाद : धर्मवीर भारती
मातम के नक़्क़ारे बजाओ मेरे लिए,
मातम और मौत के नक़्क़ारे बजाओ मेरे लिए
और भीड़ से कह दो कि मिल कर क…
1 year, 1 month ago
Mrit Ghoshit | Ankita Anand
Episode 806
मृत घोषित | अंकिता आनंद
उसके आख़िरी दिनों में
कभी टूथपेस्ट के ट्यूब को
दो टुकड़ों में काटा हो,
तो तुमने देखा होगा
कितना कुछ बचा रह जाता है
तब भी जब लगता है…
1 year, 1 month ago
Unhone Ghar Banaye | Agyeya
Episode 805
उन्होंने घर बनाये - अज्ञेय
उन्होंने घर बनाये
और आगे बढ़ गये
जहाँ वे और घर बनाएँगे।
हम ने वे घर बसाये
और उन्हीं में जम गये :
वहीं नस्ल बढ़ाएँगे
और मर जाएँग…
1 year, 1 month ago
Dharti Par Hazaar Cheezain Thin | Anupam Singh
Episode 804
धरती पर हज़ार चीजें थीं काली और खूबसूरत | अनुपम सिंह
धरती पर हज़ार चीजें थीं
काली और खूबसूरत
उनके मुँह का स्वाद
मेरा ही रंग देख बिगड़ता था
वे मुझे अपने द…
1 year, 1 month ago