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Angoothe | Arvind Srivastava
Episode 823
अंगूठे | अरविन्द श्रीवास्तव
बताओ, कहाँ मारना है ठप्पा
कहाँ लगाने हैं निशान
तुम्हारे सफ़ेद—धवल काग़ज़ पर
हम उगेंगे बिल्कुल अंडाकार
या कोई अद्भुत कलाकृति बन…
1 year, 1 month ago
Koi Sagar Nahi | Bhawani Prasad Mishra
Episode 822
कोई सागर नहीं | भवानीप्रसाद मिश्र
कोई सागर नहीं है अकेलापन
न वन है
एक मन है अकेलापन
जिसे समझा जा सकता है
आर-पार जाया जा सकता है जिसके
दिन में सौ बार
कोई साग…
1 year, 1 month ago
Waapsi | Ahmed Faraz
Episode 821
वापसी | अहमद फ़राज़
उस ने कहा
सुन
अहद निभाने की ख़ातिर मत आना
अहद निभाने वाले अक्सर
मजबूरी या महजूरी की थकन से लौटा करते हैं
तुम जाओ
और दरिया दरिया प्यास बु…
1 year, 1 month ago
Prem Ka Arthshastra | Vihaag Vaibhav
Episode 820
प्रेम का अर्थशास्त्र | विहाग वैभव
जितना हो तुम्हारे पास
उससे कम ही बताना सबसे
ख़र्च करते हुए हमेशा
थोड़ा-सा बचा लेना
माँ की गुप्त पूँजी की तरह
जब छाती पर…
1 year, 1 month ago
Machli Boli Kavi Se | K Sachidanandan | Girdhar Rathi
Episode 819
मछली बोली कवि से | के. सच्चिदानंदन
अनुवाद : गिरधर राठी
उपमा मुझे मत दो स्त्री की आँख की
स्त्री हूँ मैं स्वयं, पूरी, संपूर्ण
मुझे नहीं धरना है भेष जलपर…
1 year, 1 month ago
Aana | Kailash Manhar
Episode 818
आना | कैलाश मनहर
आऊँगा
बारिश से भीगे खेतों पर
क्वार की धूप बनकर
चमकता-सा....
आऊँगा
थके हुए बदन की रगों में
धारोष्ण दूध की तरह
उफनता-सा....
आऊँगा
रूठी हुई प्रे…
1 year, 1 month ago
Raag Bhatiyali | Kunwar Narayan
Episode 817
राग भटियाली | कुँवर नारायण
एक राग है भटियाली
बाउल संगीत से जुड़ा हुआ
अंतिम स्वर को खुला छोड़ दिया जाता है
वायुमंडल में लहराता हुआ
जैसे संपूर्ण जीवन राग स…
1 year, 1 month ago
Ek Nanha Sa Keeda | Gyanendrapati
Episode 816
एक नन्हा-सा कीड़ा | ज्ञानेन्द्रपति
यह एक नन्हा-सा कीड़ा
अभी जिसको मसल जाता पैर
जीवन की क्षणभंगुरता पर विचारने का एक लमहा
एक ठिठका हुआ क्षण
जिसको जल्दी स…
1 year, 1 month ago
Bhookh | Naresh Saxena
Episode 815
भूख | नरेश सक्सेना
भूख सबसे पहले दिमाग़ खाती है
उसके बाद आँखें
फिर जिस्म में बाक़ी बची चीज़ों को
छोड़ती कुछ भी नहीं है भूख
वह रिश्तों को खाती है
माँ का हो …
1 year, 1 month ago
Tumhe Darr Hai | Gorakh Pandey
Episode 814
तुम्हें डर है | गोरख पांडेय
हज़ार साल पुराना है उनका ग़ुस्सा
हज़ार साल पुरानी है उनकी नफ़रत
मैं तो सिर्फ़
उनके बिखरे हुए शब्दों को
लय और तुक के साथ
लौटा रह…
1 year, 1 month ago