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Bhagwan Ke Dakiye | Ramdhari Singh Dinkar
Episode 906
भगवान के डाकिए | रामधारी सिंह दिनकर
पक्षी और बादल,
ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।
हम तो समझ नहीं पाते हैं
मगर उनकी लाई चि…
1 year ago
Maika | Anwesha Rai 'Mandakini'
Episode 905
मायका | अन्वेषा राय 'मंदाकिनी'
हिंदी के शब्दकोश में
प्रत्येक शब्द का एक अर्थ लिखा है,
मगर एक शब्द है जिसका अर्थ
ना मुंशी जी को पता है,
ना महादेवी को
और न…
1 year ago
Pita Ka Hatyara | Madan Kashyap
Episode 904
पिता का हत्यारा | मदन कश्यप
उसके हाथ में एक फूल होता है
जो मुझे चाकू की तरह दिखता है
सच तो यह है कि वह चाकू ही होता है
जो कैमरों में फूल जैसा दिखता है
और…
1 year ago
Janhit Ka Kaam | Kedarnath Singh
Episode 903
जनहित का काम | केदारनाथ सिंह
मेह बरसकर खुल चुका था
खेत जुतने को तैयार थे
एक टूटा हुआ हल मेड़ पर पड़ा था
और एक चिड़िया बार-बार बार-बार
उसे अपनी चोंच से
उठान…
1 year ago
Ek Ajeeb Si Mushkil | Kunwar Narayan
Episode 902
एक अजीब-सी मुश्किल | कुँवर नारायण
एक अजीब-सी मुश्किल में हूँ इन दिनों—
मेरी भरपूर नफ़रत कर सकने की ताक़त
दिनोंदिन क्षीण पड़ती जा रही
अंग्रेज़ों से नफ़रत …
1 year ago
Prem | Krishna Mohan Jha
Episode 901
प्रेम | कृष्णमोहन झा
एक माहिर चीते की तरह
अपने पंजों को दबा कर आता है प्रेम
और जबड़े में उठाकर तुम्हें ले जाता है
अगले दिन
या अगले के अगले दिन
पंजों के नि…
1 year ago
Koshish Karne Walon Ki Haar Nahi Hoti | Sohanlal Dwivedi
Episode 900
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती | सोहनलाल द्विवेदी
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती …
1 year ago
Vijayi Vishwa Tiranga Pyara | Shyamlal Gupt 'Paarshad'
Episode 899
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा | श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला,
वीरों क…
1 year ago
Sab Kuch Keh Lene Ke Baad | Sarveshwar Dayal Saxena
Episode 898
सब कुछ कह लेने के बाद | सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
सब कुछ कह लेने के बाद
कुछ ऐसा है जो रह जाता है,
तुम उसको मत वाणी देना।
वह छाया है मेरे पावन विश्वासों की,
वह…
1 year ago
Bolne Mein Kam Se Kam Bolun | Vinod Kumar Shukla
Episode 897
बोलने में कम से कम बोलूँ | विनोद कुमार शुक्ल
बोलने में कम से कम बोलूँ
कभी बोलूँ, अधिकतम न बोलूँ
इतना कम कि किसी दिन एक बात
बार-बार बोलूँ
जैसे कोयल की बार-…
1 year ago