Podcast Episodes
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Din Ghatenge | Dinesh Singh
Episode 843
दिन घटेंगे | दिनेश सिंह
जनम के सिरजे हुए दुख
उम्र बन-बनकर कटेंगे
ज़िन्दगी के दिन घटेंगे
कुआँ अन्धा बिना पानी
घूमती यादें पुरानी
प्यास का होना वसन्ती
तितलियो…
1 year ago
Akalmandi Aur Moorkhta | Shubha
Episode 842
अकलमंदी और मूर्खता | शुभा
स्त्रियों की मूर्खता को पहचानते हुए
पुरुषों की अक्लमंदी को भी पहचाना जा सकता है
इस बात को उलटी तरह भी कहा जा सकता है
पुरुषों की…
1 year ago
Bhool Bhulaiyya | Shraddha Upadhyay
Episode 841
भूल-भूलैया | श्रद्धा उपाध्याय
हम सबसे पहले मिलेंगे दिल्ली में घुमते बेमक़सद क़दमों में
सड़कें तुम्हें घर ले जाएँगी
और मुझे भूल-भूलैया में
मैं किताबें…
1 year ago
Main Gaane Lagta | Dinesh Singh
Episode 840
मैं गाने लगता | दिनेश सिंह
अक्सर क्या होता मुझको
जो मन ही मन शर्माने लगता
तुम रोती, मैं गाने लगता
तुम घर मैं कितना खटती हो
कितने हिस्सों में बटती हो
कड़ी ध…
1 year ago
Uski Grahasthi | Rajesh Joshi
Episode 839
उसकी गृहस्थी | राजेश जोशी
थकी हारी लौटी है वो आफिस से अभी
टिफिन बाक्स को रसोई में रखती है।
मुँह पर पानी के छीटे मारती है
बाहर निकल आई लट को वापस खोंसती …
1 year ago
Tumhari Kavita | Abha Bodhisattva
Episode 838
तुम्हारी कविता | आभा बोधिसत्त्व
तुम्हारी कविता से जानती हूँ
तुम्हारे बारे में
तुम सोचते क्या हो ,
कैसा बदलाव चाहते हो
किस बात से होते हो आहत;
किस बात से खु…
1 year ago
Kaling | Shrikant Verma
Episode 837
कलिंग - श्रीकांत वर्मा
केवल अशोक लौट रहा है
और सब
कलिंग का पता पूछ रहे हैं
केवल अशोक सिर झुकाए हुए है
और सब
विजेता की तरह चल रहे हैं
केवल अशोक के कानों में …
1 year ago
Algani | Shahanshah Alam
Episode 836
अलगनी | शहंशाह आलम
अलगनी पर मैंने क्या चीज़ सुखाई
कविता की वो गीली किताबें
जिसे बारिश ने पढ़ा था पूरे मन से
जो बारिश मेघालय में होती होगी
वही बारिश हुई इ…
1 year ago
Kahan Rahegi Wah Santap Ke Saath? | Gagan Gill
Episode 835
कहाँ रहेगी वह संताप के साथ?/ गगन गिल
अगर वह उसके सीने पर
रख दे अपना सिर
या उसके कंधे पर
अगर वह छुए उसका हाथ
अक्तूबर की झुरझुरी में
थाम ले उसकी बाँह घबराक…
1 year ago
Jab Hum Mare Jayenge | Arvind Srivastava
Episode 834
जब हम मारे जाएंगे | अरविन्द श्रीवास्तव
जब हम बुन रहे होंगे
कोई हसीन ख्वाब
तुम्हारे बिल्कुल करीब आकर
बाँट रहे होंगे आत्मीयता
प्रेम व नग्न भाषा
रच रहे होंगे …
1 year ago