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Dekho Socho Samjho | Bhagwati Charan Verma
Episode 918
देखो-सोचो-समझो | भगवतीचरण वर्मा
देखो, सोचो, समझो, सुनो, गुनो औ' जानो
इसको, उसको, सम्भव हो निज को पहचानो
लेकिन अपना चेहरा जैसा है रहने दो,
जीवन की धारा मे…
1 year ago
Isiliye | Gagan Gill
Episode 917
इसीलिए | गगन गिल
वह नहीं होगा कभी भी
फाँसी पर झूलता हुआ आदमी
वारदात की ख़बरें पढ़ते हुए
सोचता था वह
गर्दन के पीछे हो रही सुरसुरी को वह
मुल्तवी करता रहत…
1 year ago
Ve Sab Meri Hi Jaati Se Thin | Rupam Mishra
Episode 916
वे सब मेरी ही जाति से थीं | रूपम मिश्र
मुझे तुम ने समझाओ अपनी जाति को चीन्हना श्रीमान
बात हमारी है हमें भी कहने दो
ये जो कूद-कूद कर अपनी सहुलियत से मर्…
1 year ago
Smriti Pita | Viren Dangwal
Episode 915
स्मृति पिता | वीरेन डंगवाल
एक शून्य की परछाईं के भीतर
घूमता है एक और शून्य
पहिये की तरह
मगर कहीं न जाता हुआ
फिरकी के भीतर घूमती
एक और फिरकी
शैशव के किसी …
1 year ago
Ve Din Aur Ye Din | Ramdarash Mishra
Episode 914
वे दिन और ये दिन | रामदरश मिश्र
तब वे दिन आते थे
उड़ते हुए
इत्र-भीगे अज्ञात प्रेम-पत्र की तरह
और महमहाते हुए निकल जाते थे
उनकी महमहाहट भी
मेरे लिए एक उपलब्…
1 year ago
Walid Ki Wafaat Par | Nida Fazli
Episode 913
वालिद की वफ़ात पर | निदा फ़ाज़ली
तुम्हारी क़ब्र पर
मैं फ़ातिहा पढ़ने नहीं आया
मुझे मालूम था
तुम मर नहीं सकते
तुम्हारी मौत की सच्ची ख़बर जिस ने उड़ाई थी
वो …
1 year ago
Devi Banne Ki Raah Mein | Priya Johri 'Muktipriya'
Episode 912
देवी बनने की राह में | प्रिया जोहरी 'मुक्ति प्रिया'
देवी बनने की राह में
लंबा सफ़र तय किया हमने
कई भूमिकाऐँ बदली
आंसू की बूंदो का स्वाद चखा
खून बहाया
कटा …
1 year ago
Main Sabse Choti Hun | Sumitranandan Pant
Episode 911
मैं सबसे छोटी हूँ | सुमित्रानंदन पन्त
मैं सबसे छोटी होऊँ,
तेरा अंचल पकड़-पकड़कर
फिरूँ सदा माँ! तेरे साथ,
कभी न छोड़ूँ तेरा हाथ!
बड़ा बनाकर पहले हमको
तू पीछ…
1 year ago
Aapki Yaad Aati Rahi Raat Bhar | Makdoom Mohiuddin
Episode 910
आप की याद आती रही रात भर | मख़दूम मुहिउद्दीन
आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
रात भर दर्द की शम्अ जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही …
1 year ago
Khidki Par Subah | TS Eliot | Translation - Dharmvir Bharti
Episode 909
खिड़की पर सुबह | टी. एस. एलियट
अनुवाद : धर्मवीर भारती
नीचे के बावर्चीख़ाने में खड़क रही हैं नाश्ते की तश्तरियाँ
और सड़क के कुचले किनारों के बग़ल-बग़ल—
मु…
1 year ago