Podcast Episodes
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Aana | Kailash Manhar
Episode 818
आना | कैलाश मनहर
आऊँगा
बारिश से भीगे खेतों पर
क्वार की धूप बनकर
चमकता-सा....
आऊँगा
थके हुए बदन की रगों में
धारोष्ण दूध की तरह
उफनता-सा....
आऊँगा
रूठी हुई प्रे…
1 year, 3 months ago
Raag Bhatiyali | Kunwar Narayan
Episode 817
राग भटियाली | कुँवर नारायण
एक राग है भटियाली
बाउल संगीत से जुड़ा हुआ
अंतिम स्वर को खुला छोड़ दिया जाता है
वायुमंडल में लहराता हुआ
जैसे संपूर्ण जीवन राग स…
1 year, 3 months ago
Ek Nanha Sa Keeda | Gyanendrapati
Episode 816
एक नन्हा-सा कीड़ा | ज्ञानेन्द्रपति
यह एक नन्हा-सा कीड़ा
अभी जिसको मसल जाता पैर
जीवन की क्षणभंगुरता पर विचारने का एक लमहा
एक ठिठका हुआ क्षण
जिसको जल्दी स…
1 year, 3 months ago
Bhookh | Naresh Saxena
Episode 815
भूख | नरेश सक्सेना
भूख सबसे पहले दिमाग़ खाती है
उसके बाद आँखें
फिर जिस्म में बाक़ी बची चीज़ों को
छोड़ती कुछ भी नहीं है भूख
वह रिश्तों को खाती है
माँ का हो …
1 year, 3 months ago
Tumhe Darr Hai | Gorakh Pandey
Episode 814
तुम्हें डर है | गोरख पांडेय
हज़ार साल पुराना है उनका ग़ुस्सा
हज़ार साल पुरानी है उनकी नफ़रत
मैं तो सिर्फ़
उनके बिखरे हुए शब्दों को
लय और तुक के साथ
लौटा रह…
1 year, 3 months ago
Raahein | Narendra Sharma
Episode 813
राहें | नरेंद्र शर्मा
कुहरा छाया है गिरि-वन पर,
गिरि-शिखरों पर;
नहीं रहा आकाश आज आकाश,
घिरे हैं बादल धौरे;
मैं नीचे समतल पठार पर
चला जा रहा—
लेकिन ऊँचे तल क…
1 year, 3 months ago
Din Baune Ho Gaye | Umakant Malviya
Episode 812
दिन बौने हो गए | उमाकांत मालवीय
रातें लम्बी हुईं
दिन बौने हो गए ।
ठिगने कद वाले दिन
लम्बी परछाइयाँ
धूप की इकाई पर
तिमिर की दहाइयाँ
रातें पत्तल हुईं
दिन दौने …
1 year, 3 months ago
Kuch Ishq Kia Kuch Kaam Kia | Faiz Ahmed Faiz
Episode 811
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया/ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिक़ी करते थे
हम…
1 year, 3 months ago
Purani Haveli | Khagendra Thakur
Episode 810
पुरानी हवेली | खगेंद्र ठाकुर
इस हवेली से
गाँव में आदी-गुड़ बंटे
सोहर की धुन सुने
बहुत दिन हो गए
इस हवेली से
सत्यनारायण का प्रसाद बंटे
घड़ी-घंट की आवाज सुने…
1 year, 3 months ago
Deewana Dil | Nasira Sharma
Episode 809
दीवाना दिल - नासिरा शर्मा
अक्सर सोचती हूँ मैं
जब भी मैंने चलना चाहा तुम्हें लेकर अपने संग
नहीं समझ पाए तुम वह राहें
तुम्हारे खेतों से उगी गेंहूँ की बालि…
1 year, 3 months ago