Podcast Episodes
Back to Search
Aapke Liye | Ajay Durgyey
Episode 754
आपके लिए | अजय दुर्ज्ञेय
आप यहां से जाइये!
आप जब मेरी कविताएँ सुनेंगे
तो ऐसा लगेगा कि जैसे
कोई दशरथ-मांझी पहाड़ पर
बजा रहा हो हथौडे
मैं जब बोलूंगा
तो आपको …
1 year, 3 months ago
Jab Teri Samundar Aankhon Mein | Faiz Ahmed Faiz
Episode 753
जब तेरी समुंदर आँखों में | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ये धूप किनारा शाम ढले
मिलते हैं दोनों वक़्त जहाँ
जो रात न दिन जो आज न कल
पल-भर को अमर पल भर में धुआँ
इस धूप कि…
1 year, 3 months ago
Kabhi Kabhi Jeevan Mein | Laxmishankar Vajpeyi
Episode 752
कभी कभी जीवन में ऐसे भी क्षण आये | लक्ष्मीशंकर वाजपेयी
कभी कभी जीवन में ऐसे भी कुछ क्षण आये
कहना चाहा पर होठों से बोल नहीं फूटे।
महज़ औपचारिकता अक्सर हो…
1 year, 3 months ago
Jagah | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 751
जगह | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
खड़े-खड़े मेरे पाँव दुखने लगे थे
थोड़ी-सी जगह चाहता था बैठने के लिए
कलि को मिल गया था
राजा परीक्षेत का मुकुट
मैं बिलबिलाता र…
1 year, 3 months ago
Gar Humne Dil Sanam Ko Diya | Nazeer Akbarabadi
Episode 750
गर हम ने दिल सनम को दिया | नज़ीर अकबराबादी
गर हम ने दिल सनम को दिया फिर किसी को क्या
इस्लाम छोड़ कुफ़्र लिया फिर किसी को क्या
क्या जाने किस के ग़म में ह…
1 year, 3 months ago
Jis Ka Koi Intezaar Na Kar Raha Ho | Afzal Ahmed Sayyid
Episode 749
जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो/ अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो
उसे नहीं जाना चाहिए
वापस
आख़िरी दरवाज़ा बंद होने से पहले
जिस का कोई इं…
1 year, 3 months ago
Ek Lamhe Se Doosre Lamhe Tak | Shaharyar
Episode 748
एक लम्हे से दूसरे लम्हे तक | शहरयार
एक आहट अभी दरवाज़े पे लहराई थी
एक सरगोशी अभी कानों से टकराई थी
एक ख़ुश्बू ने अभी जिस्म को सहलाया था
एक साया अभी कमरे …
1 year, 3 months ago
Chidimaar Ne Chidiya Maari | Kedarnath Aggarwal
Episode 747
चिड़ीमार ने चिड़िया मारी | केदारनाथ अग्रवाल
हे मेरी तुम!
चिड़ीमार ने चिड़िया मारी;
नन्नी-मुन्नी तड़प गई
प्यारी बेचारी।
हे मेरी तुम!
सहम गई पौधों की सेना,
प…
1 year, 3 months ago
Gharaunde | Avtar Engel
Episode 746
घरौंदे | अवतार एनगिल
सागर किनारे
खेलते दो बच्चों ने
मिलकर घरौंदे बनाए
देखते-देखते
लहरों के थपेड़े आए
उनके घर गिराए
और
भागकर सागर में जा छिपे
माना, कि सदैव ऎसा…
1 year, 3 months ago
Gaveshna | Aakash
Episode 745
गवेषणा | आकाश
इस नुमाइश मे ईश्वर खोज रहा हूँ,
बच्चों की मानिंद बौराया हुआ,
इस दुकान से उस दुकान,
उथली रौशनी की परिधि के भीतर,
चमकीली भीड़ में घिरे,
जहाँ क…
1 year, 3 months ago