Podcast Episodes
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Aadat | Gulzar
Episode 774
आदत | गुलज़ार
साँस लेना भी कैसी आदत है
जिए जाना भी क्या रिवायत है
कोई आहट नहीं बदन में कहीं
कोई साया नहीं है आँखों में
पाँव बेहिस हैं चलते जाते हैं
इक सफ़र…
1 year, 2 months ago
Auratein | Shubha
Episode 773
औरतें | शुभा
औरतें मिट्टी के खिलौने बनाती हैं
मिट्टी के चूल्हे
और झाँपी बनाती हैं
औरतें मिट्टी से घर लीपती हैं
मिट्टी के रंग के कपड़े पहनती हैं
और मिट्टी क…
1 year, 2 months ago
Swapn Mein Pita | Ghulam Mohammad Sheikh
Episode 772
स्वप्न में पिता | ग़ुलाम मोहम्मद शेख़
बापू, कल तुम फिर से दिखे
घर से हज़ारों योजन दूर यहाँ बाल्टिक के किनारे
मैं लेटा हूँ यहीं,
खाट के पास आकर खड़े आप इस…
1 year, 2 months ago
Us Din | Rupam Mishra
Episode 771
उस दिन | रूपम मिश्र
उस दिन कितने लोगों से मिली
कितनी बातें , कितनी बहसें कीं
कितना कहा ,कितना सुना
सब ज़रूरी भी लगा था
पर याद आते रहे थे बस वो पल जितन…
1 year, 2 months ago
Manushya | Vimal Chandra Pandey
Episode 770
मनुष्य - विमल चंद्र पाण्डेय
मुझे किसी की मृत्यु की कामना से बचना है
चाहे वो कोई भी हो
चाहे मैं कितने भी क्रोध में होऊँ
और समय कितना भी बुरा हो
सामने वाला…
1 year, 2 months ago
Apne Prem Ke Udveg Mein | Agyeya
Episode 769
अपने प्रेम के उद्वेग में | अज्ञेय
अपने प्रेम के उद्वेग में मैं जो कुछ भी तुमसे कहता हूँ, वह सब पहले कहा जा चुका है।
तुम्हारे प्रति मैं जो कुछ भी प्रणय…
1 year, 2 months ago
Tum | Adnan Kafeel Darwesh
Episode 768
तुम | अदनान कफ़ील दरवेश
जब जुगनुओं से भर जाती थी
दुआरे रखी खाट
और अम्मा की सबसे लंबी कहानी भी
ख़त्म हो जाती थी
उस वक़्त मैं आकाश की तरफ़ देखता
और मुझे वह
ठी…
1 year, 2 months ago
Prem Ke Prasthan | Anupam Singh
Episode 767
प्रेम के प्रस्थान | अनुपम सिंह
सुनो,
एक दिन बन्द कमरे से निकलकर हम दोनों
पहाड़ों की ओर चलेंगे
या फिर नदियों की ओर
नदी के किनारे,
जहाँ सरपतों के सफ़ेद फूल …
1 year, 3 months ago
Dhoop Bhi To Barish Hai | Shahanshah Alam
Episode 766
धूप भी तो बारिश है | शहंशाह आलम
धूप भी तो बारिश है
बारिश बहती है देह पर
धूप उतरती है नेह पर
मेरे संगीतज्ञ ने मुझे बताया
धूप है तो बारिश है
बारिश है तो धूप…
1 year, 3 months ago
Jo Ulajhkar Reh Gayi Hai Filon Ke Jaal Mein | Adam Gondvi
Episode 765
जो उलझकर रह गई है फ़ाइलों के जाल में | अदम गोंडवी
जो उलझकर रह गई है फ़ाइलों के जाल में
गाँव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में
बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह …
1 year, 3 months ago