Podcast Episodes
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Main Gaane Lagta | Dinesh Singh
Episode 840
मैं गाने लगता | दिनेश सिंह
अक्सर क्या होता मुझको
जो मन ही मन शर्माने लगता
तुम रोती, मैं गाने लगता
तुम घर मैं कितना खटती हो
कितने हिस्सों में बटती हो
कड़ी ध…
1 year, 2 months ago
Uski Grahasthi | Rajesh Joshi
Episode 839
उसकी गृहस्थी | राजेश जोशी
थकी हारी लौटी है वो आफिस से अभी
टिफिन बाक्स को रसोई में रखती है।
मुँह पर पानी के छीटे मारती है
बाहर निकल आई लट को वापस खोंसती …
1 year, 2 months ago
Tumhari Kavita | Abha Bodhisattva
Episode 838
तुम्हारी कविता | आभा बोधिसत्त्व
तुम्हारी कविता से जानती हूँ
तुम्हारे बारे में
तुम सोचते क्या हो ,
कैसा बदलाव चाहते हो
किस बात से होते हो आहत;
किस बात से खु…
1 year, 2 months ago
Kaling | Shrikant Verma
Episode 837
कलिंग - श्रीकांत वर्मा
केवल अशोक लौट रहा है
और सब
कलिंग का पता पूछ रहे हैं
केवल अशोक सिर झुकाए हुए है
और सब
विजेता की तरह चल रहे हैं
केवल अशोक के कानों में …
1 year, 2 months ago
Algani | Shahanshah Alam
Episode 836
अलगनी | शहंशाह आलम
अलगनी पर मैंने क्या चीज़ सुखाई
कविता की वो गीली किताबें
जिसे बारिश ने पढ़ा था पूरे मन से
जो बारिश मेघालय में होती होगी
वही बारिश हुई इ…
1 year, 2 months ago
Kahan Rahegi Wah Santap Ke Saath? | Gagan Gill
Episode 835
कहाँ रहेगी वह संताप के साथ?/ गगन गिल
अगर वह उसके सीने पर
रख दे अपना सिर
या उसके कंधे पर
अगर वह छुए उसका हाथ
अक्तूबर की झुरझुरी में
थाम ले उसकी बाँह घबराक…
1 year, 2 months ago
Jab Hum Mare Jayenge | Arvind Srivastava
Episode 834
जब हम मारे जाएंगे | अरविन्द श्रीवास्तव
जब हम बुन रहे होंगे
कोई हसीन ख्वाब
तुम्हारे बिल्कुल करीब आकर
बाँट रहे होंगे आत्मीयता
प्रेम व नग्न भाषा
रच रहे होंगे …
1 year, 2 months ago
Marghat | Raghivir Sahay
Episode 833
मरघट | रघुवीर सहाय
शानदार मौत थी
इसलिए कि कोई न भीड़ थी
न था रोना-धोना
हम लोग एक बड़े ख़ाली खेत में गए
गाँव के सिमटने से बचा रह गया था जो
और एक हल्की-सी दे…
1 year, 3 months ago
Ya Devi | Viren Dangwal
Episode 832
या देवि! | वीरेन डंगवाल
माथे पर एक आँख लम्बवत
उसके भी ऊपर मुकुट
बहुत सारे हाथ
मगर दीखते दो ही :
एक में टपकता मुंड।
दुसरे में टपटपाता खड्ग।
शेर नीचे खड़ा है।…
1 year, 3 months ago
Behnein | Abha Bodhisattva
Episode 831
बहनें | आभा बोधिसत्त्व
बहनें होती हैं,
अनबुझ पहेली-सी
जिन्हें समझना या सुलझाना
इतना आसान नही होता जितना
लटों की तरह उलझी हुई दुनिया को ,
इन्हें समझते और सु…
1 year, 3 months ago