Podcast Episodes
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Aunga | Leeladhar Jagudi
Episode 828
आऊँगा | लीलाधर जगूड़ी
नए अनाज की ख़ुशबू का पुल पार करके
मैं तुम्हारे पास आऊँगा
ज्यों ही तुम मेरे शब्दों के पास आओगे
मैं तुम्हारे पास आऊँगा
जैसे बादल पहाड़…
1 year, 3 months ago
Mann Ke Panne | Nasira Sharma
Episode 827
मन के पन्ने | नासिरा शर्मा
जब तुम थककर सोते हो
तो तुम्हारे उजले तलवों को देख कर
जाने क्यों ख़याल आता है उसपर लिख दूँ
मन के इंद्रधनुष से एक प्रेम-पत्र
ज…
1 year, 3 months ago
Bhavsagar | Vishwanath Prasad Tiwari
Episode 826
भवसागर | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
इसी में बोना है अमर बीज
इसी में पाना है खोना है प्यार
भवसागर है यह संतों का
इसी में ढूंढ़ना है
निकलने का द्वार
1 year, 3 months ago
Nasht Kuch Bhi Nahi Hota | Priyadarshan
Episode 825
नष्ट कुछ भी नहीं होता | प्रियदर्शन
नष्ट कुछ भी नहीं होता,
धूल का एक कण भी नहीं,
जल की एक बूंद भी नहीं
बस सब बदल लेते हैं रूप
उम्र की भारी चट्टान के नीचे
प्…
1 year, 3 months ago
Prarthna | Rachit
Episode 824
प्रार्थना | रचित
ईश्वर,
ध्यान देना…
जब खड़ा होना पड़े मुझे
तो अपने अस्तित्व से ज़्यादा जगह न घेरूँ।
मैं ऋग्वेद के चरवाहों की करुणा के साथ कहता हूँ—
मुझे इस…
1 year, 3 months ago
Angoothe | Arvind Srivastava
Episode 823
अंगूठे | अरविन्द श्रीवास्तव
बताओ, कहाँ मारना है ठप्पा
कहाँ लगाने हैं निशान
तुम्हारे सफ़ेद—धवल काग़ज़ पर
हम उगेंगे बिल्कुल अंडाकार
या कोई अद्भुत कलाकृति बन…
1 year, 3 months ago
Koi Sagar Nahi | Bhawani Prasad Mishra
Episode 822
कोई सागर नहीं | भवानीप्रसाद मिश्र
कोई सागर नहीं है अकेलापन
न वन है
एक मन है अकेलापन
जिसे समझा जा सकता है
आर-पार जाया जा सकता है जिसके
दिन में सौ बार
कोई साग…
1 year, 3 months ago
Waapsi | Ahmed Faraz
Episode 821
वापसी | अहमद फ़राज़
उस ने कहा
सुन
अहद निभाने की ख़ातिर मत आना
अहद निभाने वाले अक्सर
मजबूरी या महजूरी की थकन से लौटा करते हैं
तुम जाओ
और दरिया दरिया प्यास बु…
1 year, 3 months ago
Prem Ka Arthshastra | Vihaag Vaibhav
Episode 820
प्रेम का अर्थशास्त्र | विहाग वैभव
जितना हो तुम्हारे पास
उससे कम ही बताना सबसे
ख़र्च करते हुए हमेशा
थोड़ा-सा बचा लेना
माँ की गुप्त पूँजी की तरह
जब छाती पर…
1 year, 3 months ago
Machli Boli Kavi Se | K Sachidanandan | Girdhar Rathi
Episode 819
मछली बोली कवि से | के. सच्चिदानंदन
अनुवाद : गिरधर राठी
उपमा मुझे मत दो स्त्री की आँख की
स्त्री हूँ मैं स्वयं, पूरी, संपूर्ण
मुझे नहीं धरना है भेष जलपर…
1 year, 3 months ago